भारतीय यूजर्स द्वारा सोशल मीडिया में पाकिस्तान पर टीका-टिप्पणियां तो हर दिन ही होती रहती हैं लेकिन आज यहां पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनसे जुड़ा पनामा पेपर्स लीक मामला ट्रेंडिंग टॉपिक था. नवाज शरीफ और उनके तीन बच्चों पर विदेशी खातों के जरिए अपनी बेनामी आय को टैक्स हेवन में छिपाने का आरोप है. यह मामला कानूनी फर्म मोसैक फोन्सेका के दस्तावेज लीक होने के बाद सामने आया था.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में आज इस मामले की अहम सुनवाई हुई, जहां शीर्ष अदालत का फैसला नवाज शरीफ के लिए फौरी राहत लेकर आया है. कोर्ट ने उनके खिलाफ तुरंत कोई फैसला न सुनाते हुए इन आरोपों की संयुक्त जांच दल (जेआईटी) से दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है. भारत में ज्यादातर लोगों ने इस खबर को शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाया है कि हमारे यहां जिन लोगों के नाम पनामा पेपर्स लीक में थे, उनकी जांच कहां तक पहुंची है. भारत से जिन बड़ी शख्सियतों के नाम पनामा पेपर्स के जरिए उजागर हुए थे उनमें फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन और अजय देवगन के साथ-साथ कुछ और जाने-अनजाने नाम भी शामिल थे. सोशल मीडिया पर आज इनका जिक्र भी हुआ. पत्रकार राणा अय्यूब ने ट्वीट किया है, ‘नवाज शरीफ से जुड़े पनामा पेपर्स मामले के लिए पाकिस्तान में संयुक्त जांच दल बन गया है. वहीं भारत में देवगन, बच्चन और दूसरे लोग राष्ट्रभक्ति की बातें गाने लगे हैं.’ नवाज शरीफ को लेकर कई लोगों ने चुटकियां भी ली हैं. जैसे चैती नरूला का कहना है, ‘कुल मिलाकर नवाज शरीफ अपने जीवन में उतने शरीफ भी नहीं रहे!’

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को उनके एक बयान को लेकर जमकर फटकार लगाई है. एनजीटी ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके बयान को स्तब्ध करने वाला बताया और कहा, ‘आपको (श्रीश्री रविशंकर को) अपनी जिम्मेदारी का कोई एहसास नहीं है. आपको बोलने की आजादी है तो क्या आप कुछ भी बोल देंगे.’ श्रीश्री रविशंकर ने मार्च, 2016 में ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ के दौरान यमुना के डूब क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए केंद्र सरकार और एनजीटी को दोषी बताया था. उन्होंने दलील दी थी कि उनकी संस्था ने कार्यक्रम के लिए एनजीटी सहित सभी संस्थाओं से जरूरी अनुमति ले ली थीं.

सोशल मीडिया में इस खबर पर ज्यादातर लोगों ने आध्यात्मिक गुरु की आलोचना की है. फेसबुक पर आयुष कौशिक की टिप्पणी है, ‘दूसरों को विनम्रता का पाठ पढ़ाना और अपनी गलतियों को स्वीकार करने की बात सिखाना बहुत आसान है, लेकिन खुद इसका पालन करना बहुत कठिन.’ ऐसी ही एक टिप्पणी में श्रीश्री रविशंकर का विरोध करते हुए विभाष कुमार श्रीवास्तव ने लिखा है, ‘इनकी संस्कृति, क्या हमारी है? इनका बहिष्कार करना ही होगा.’

इन दोनों ही खबरों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

जोति मणि | @jothims

पाकिस्तान में चल रहे पनामा पेपर्स मामले की इतनी चर्चा कर रहे भारतीय मीडिया में क्या इतनी हिम्मत है कि वह नरेंद्र मोदी से पूछे कि भारत से जुड़े पनामा पेपर्स का क्या हुआ?

रॉफ्ल यादव‏ | @DoosriDukaan

पनामा में पैसा छुपाना कोई स्कैम नहीं था. बस ये है कि गरीब लोग पैसा पजामा में छुपा के रखते हैं और अमीर लोग पनामा में.

मंजुल | @MANJULtoons

‘वो लाल बत्ती हटा दो’
‘मुझे अपनी कार के ऊपर उसकी जरूरत नहीं है!’

संजय मौर्या |‏ @_SMORYA

पनामा पेपर्स लीक मामले में पाकिस्तान की अदालत ने नवाज शरीफ पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. इनमें हिंदुस्तानियों के नाम भी थे साहब? कौन कुंडली मार के बैठ गया उन पर?

नमो भक्त‏ | @cooladitaya

लगता है कि पाकिस्तान में तख्ता पलट फ़िज़ा में है. नवाज़ शरीफ के खिलाफ पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने जांच का आदेश दिया है.

इमरान खान | facebook/imran.entertainment

इस तबाही (एनजीटी की श्रीश्री रविशंकर को फटकार) और यमुना के डूब क्षेत्र को हुए नुकसान के बाद ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ को ‘आर्ट ऑफ किलिंग’ कहा जाना चाहिए.

लक्ष्मण मारपल्ले | laxman.marpalle

आध्यात्मिक और धार्मिक लोगों को कानून का पालन करने वाला नागरिक होना चाहिए. अनुयायी होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास कानून हाथ में लेने का लायसेंस है.