अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम की समीक्षा करने के कार्यकारी आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं. हालांकि इससे भारतीय आईटी कंपनियों में अभी कोई खास अफरातफरी नहीं मची है क्योंकि फिलहाल नियम जस के तस हैं. लेकिन यह भी सच है ही कि ट्रंप की बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन वाली नीति का मतलब भविष्य में भारतीयों के लिए अमेरिका में कम मौके हो सकता है जो हर साल एच-1बी वीजा के सबसे बड़े हिस्सेदार होते हैं.

ट्रंप ने अपने आदेश में संघीय एजेंसियों से वे उपाय सुझाने के लिए कहा है जिनसे सुनिश्चित हो सके कि एच-1बी वीजा उन्हीं लोगों को मिले जो सबसे ज्यादा दक्ष यानी स्किल्ड हों और जिनका वेतन भी सबसे ज्यादा हो. इसने भारतीय आईटी कंपनियों को भविष्य के लिए सतर्क कर दिया है. अमेरिका की सरकार अब अपने नागरिकों के हित केंद्र में रखना चाहती है और यही वजह है कि इस चुनौती भरे माहौल में टिके रहने के लिए इन कंपनियों को और भी नए तरीके खोजने होंगे.

बीते साल ब्रिटेन ने भी वीजा से जुड़े वे नियम सख्त कर दिए जिनका इस्तेमाल कंपनियां अपने कर्मचारियों का तबादला ब्रिटेन करने के लिए करती हैं. इस सुविधा का सबसे ज्यादा फायदा भी भारतीय कंपनियां ही उठाती हैं. ऑस्ट्रेलिया ने भी वीजा से जुड़े नियम सख्त कर दिए हैं और न्यूजीलैंड भी उसकी राह चलेगा. यानी निर्यात बाजारों में भारतीय श्रम शक्ति पर पाबंदियां बढ़ती जा रही हैं.

हालांकि इससे भारतीय कंपनियों के उस राह पर बढ़ने की प्रक्रिया तेज ही होगी जिसे वे अपना चुकी हैं. अब जोर सस्ते मानव संसाधनों से ज्यादा ऊंची उत्पादकता पर देना होगा. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और ऑटोमेशन के चलते पहले ही उस काम पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है जो एच-1बी वीजा का फायदा उठाने वाले भारतीय आईटी पेशेवर करते हैं. इसलिए कंपनियों को अब परामर्श यानी कंसल्टिंग से जुड़ी क्षमताएं बढ़ानी होंगी और साथ ही बिग डेटा एनैलिटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे नए और संभावनाओं से भरे क्षेत्रों में दाखिल होना होगा. तभी वे अपने प्रतिस्पर्धियों के आगे टिक पाएंगी. आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों की कार्यशैली में आए बदलाव के चलते अब ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी तकनीक की सुविधा जब चाहे तब हासिल की जा सकती है. भारतीय कंपनियों को इससे मदद मिलेगी.

ये कंपनियां जिस तरह के वेतन की पेशकश करती हैं उससे उनकी श्रमशक्ति की गुणवत्ता का पता चलता है. नए प्रस्तावों में कहा गया है कि एच-1बी वीजा उसे ही दिया जाए जिसे कम से कम एक लाख 30 हजार डॉलर का वेतन मिलता हो. भारतीय आईटी कंपनियों को इसे एक चुनौती की तरह लेना चाहिए और अपने कारोबार को पुनर्व्यवस्थित करना चाहिए ताकि वे ऐसे बदलावों से तालमेल बिठाने से कहीं आगे जाकर इनका फायदा उठा सकें. (स्रोत)