क्या जुलाई में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की ओर से संयुक्त उम्मीदवार भी उतारा जा सकता है? यह सवाल इसलिए क्योंकि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चल रही हलचल इसी तरफ इशारा करती है. इसी आधार पर टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर में विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के किसी संयुक्त उम्मीदवार को उतारे जाने की संभावना भी जताई गई है.

खबर के मुताबिक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की है. सोनिया गांधी के निवास स्थान 10-जनपथ पर दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई. इस बीच उन्होंने अहम मसलों पर विपक्ष के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर बल दिया. सूत्र बताते हैं कि इस मुलाकात में राष्ट्रपति चुनाव पर बात तो नहीं हुई, लेकिन इस मसले पर गैर-भाजपा दलों के ठंडे रुख को लेकर कांग्रेस की बेचैनी जरूर साफ दिखी. संभवत: इसी वजह से मुलाकात के तुरंत बाद नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) की तरफ से एक बयान भी जारी किया गया.

बयान में पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा, ‘हम इस पक्ष में हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष को संयुक्त प्रत्याशी उतारना चाहिए. चूंकि विपक्ष में सोनिया गांधी सबसे वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए उन्हें इस पहल की अगुवाई करनी चाहिए. उन्हें विपक्षी दलों से बात करनी चाहिए. हम पक्के तौर पर मानते हैं कि सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवार को विपक्ष से चुनौती मिलनी चाहिए. उसका मुकाबला किया जाना चाहिए.’

त्यागी के मुताबिक, नीतीश कुमार ने अपनी तरफ से इस सिलसिले में एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और वाम दलों के नेताओं से बात की है. अब इस मामले को कांग्रेस की तरफ से आगे बढ़ाया जाना चाहिए. सूत्रों की मानें तो सिर्फ नीतीश और उनकी पार्टी ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी तथा बीजू जनता दल और उसके मुखिया नवीन पटनायक भी चाहते हैं कि राष्ट्रपति पद का संयुक्त उम्मीदवार उतारा जाए. कई नेताओं का यह भी मानना है कि अगर राष्ट्रपति चुनाव में ऐसा गठजोड़ बन पाया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन बनने की संभावना भी बन सकती है.