कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन से वापस लाने के मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट में और सुनवाई नहीं होगी. शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को इससे संबंधित दो याचिकाएं खारिज कर दीं.

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की खंडपीठ ने कहा, ‘हम केंद्र के जवाब से संतुष्ट हैं कि सरकार प्रयास कर रही है. इसलिए इस मामले में अदालत को आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है. वैसे भी, राजनयिक कोशिशों पर निगरानी रखना अदालत का काम नहीं है.’ कोहिनूर हीरे को वापस लाने की मांग करने वाली याचिकाओं को पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने स्वीकार किया था. हालांकि चीफ जस्टिस खेहर की बेंच ने इन्हें ‘तुच्छ’ करार देते हुए कहा, ‘हम हैरान हैं कि किस तरह की याचिकाएं दाखिल की जाती हैं.’

अदालत में केंद्र सरकार ने उन प्रयासों की भी जानकारी दी, जो उसकी ओर से कोहिनूर को भारत लाने के लिए किए जा रहे हैं. इससे पहले सितंबर-2016 में भी केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा था कि कोहिनूर हीरा भारत का है. इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने महाराजा दलीप सिंह से उस वक्त धोखे से हड़प लिया था, जब वे नाबालिग थे. इस 105 कैरेट के हीरे को पंजाब रियासत के महाराजा ने ब्रिटेन की महारानी को तोहफे में नहीं दिया था. इस हीरे की कीमत करीब 20 करोड़ डॉलर (लगभग 12.92 अरब रुपए) बताई जाती है.