क्या आप मानते हैं कि आपके विश्व संस्कृति महोत्सव के कारण यमुना के डूब क्षेत्र को नुकसान हुआ है?

देखिये, यमुना की तरफ से हमें ऐसे किसी नुकसान की कोई शिकायत नहीं मिली. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) जिस नुकसान की बात कर रहा है, वह सिर्फ एक नकारात्मक सोच का नतीजा है.

कैसी नकारात्मक सोच?

विश्व संस्कृति महोत्सव शुरू होने के पहले से लेकर आज तक एनजीटी नुकसान के नाम पर जो रायता फैला रहा है, वह नकारात्मक सोच नहीं तो और क्या है! जैसे भारतीय शादी में ऐन मौके पर किसी जरूरी इंसान के रूठने-मनाने का जो खेल चलता है, वैसा ही यहां भी हुआ. मेरी इतनी भव्य शादी में विदेश से कितनी बड़ी बारात आ रही थी...

आपकी शादी!

अब्ब्ब... मेरा मतलब, जो विश्व संस्कृति महोत्सव था, वह किसी भव्य शादी से कम तो नहीं था. इधर विदेश से मेहमान आने वाले थे, ठीक उससे पहले एनजीटी ने जो किया आप अच्छे से जानती होंगी. ऐसे मौके के लिए भोजपुरी में एक कहावत है, ‘द्वारे खड़ी बारात, समधिन को लगी हगास!’

कुल मिलाकर आप मानते हैं कि यमुना को आपके आयोजन से कोई नुकसान नहीं हुआ

यमुना का नुकसान उसमें गिरने वाले फैक्ट्रियों के वेस्ट, नालों और सीवेज की गंदगी उसमें मिलने से हुआ है. विश्व संस्कृति महोत्सव से नदी को नुकसान पहुंचने की बात मैं तब मानता, जब यमुना के किनारे, दुनियाभर से आए लोगों की विविधता भरी गंदगी से भरे होते! लेकिन हमने शौचालयों और बाकी साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था की थी, इसलिए ऐसा कोई भी नुकसान नहीं हुआ.

लेकिन एनजीटी का कहना है कि विश्व संस्कृति महोत्सव से यमुना के डूब क्षेत्र में हुए नुकसान की भरपाई करने में 10 साल लग जाएंगे. इस नुकसान की भरपाई के लिए आप क्या करेंगे?

मैं पहले भी कह चुका हूं, यमुना की तरफ से हमें नुकसान को लेकर कोई शिकायत पत्र नहीं मिला है, सो भरपाई का सवाल ही नहीं उठता. हां, लेकिन हम ट्रिब्यूनल के लोगों को नुकसान के स्ट्रेस से निकालने के लिए स्ट्रेस फ्री कार्यशालाएं करवाने का प्लान कर रहे हैं. उन्हें हम सामूहिक सुदर्शन क्रिया भी कराएंगे और वह भी बिल्कुल निशुल्क.

एनजीटी का यह भी आरोप है कि आपके महोत्सव के कारण यमुना की जैव विविधता को बहुत नुकसान पहुंचा है.

उन्हें सिर्फ यमुना की जैव विविधता की पड़ी है, इधर मैं विश्व की सांस्कृतिक विविधता बचाने की कोशिश कर रहा हूं!

केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय, सांस्कृतिक कार्यों के लिए सिर्फ 15-20 लाख रुपये ही किसी संस्था को देता है. फिर आपके व्यक्ति विकास केंद्र को मंत्रालय की तरफ से 2.25 करोड़ रुपये कैसे मिल गए?

(मुस्कुराते हुए) उन्होंने 2.25 करोड़ दिए ताकि फिर ब्याज समेत दोगुनी रकम वसूल सकें!

अगला विश्व संस्कृति महोत्सव कब और कहां आयोजित करेंगे?

यमुना बैंक को तो हम डुबा चुके, अब्ब्ब... मेरा मतलब यमुना बैंक पर फेस्टिवल तो हो चुका है, अगली बार बैंक ऑफ गंगा पर करेंगे. कब करेंगे, यह अभी तय नहीं है.

यह बताइये, आप नदियों के किनारे ही सारे बड़े प्रोग्राम करना क्यों चाहते हैं?

मैंने कर्नाटक की भद्र नदी के किनारे ही सुदर्शन श्वास पद्धति की खोज की थी. आप देखिए, मेरी जटाएं भी पानी की धारा की तरह प्रतीत होंगी... कुल मिलाकर मेरा नदियों से गहरा लगाव है. नदियों की धार के साथ अपनी जटाओं की धाराओं को लयबद्ध करने से मेरे भीतर अदभुत ऊर्जा का संचार होता है.

आप अपना सबसे बड़ा प्रतियोगी किसे मानते हैं?

बाबा रामदेव को.

वह क्यों?

सिर्फ आठ-नौ सालों में पतंजलि का प्रॉफिट 163 करोड़ से बढ़कर 5000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, लेकिन श्री श्री आयुर्वेद 14 साल पुराना होने के बावजूद अभी बहुत पीछे है. जबकि मेरे फॉलोअर बाबा रामदेव से कहीं ज्यादा हैं और पूरी दुनिया में फैले हुए हैं, फिर भी पता नहीं, उनकी मार्केटिंग मेरी मार्केटिंग से तेज कैसे है!

आप और बाबा रामदेव इस समय देश के सबसे सफल उद्योगपतियों में से हैं. दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ जैसे संत मुख्यमंत्री बन गए. ऋषि और योगी अब तपस्या छोड़ व्यापार और राजनीति क्यों करने लगे?

(मुस्कुराते हुए) अब समय आ गया है कि व्यापार और राजनीति से अलग दूसरे क्षेत्रों में भी योगी और संत अपनी प्रतिभा दिखाएं. धीरे-धीरे यहां की हर चीज योगियों और ऋषियों के नियंत्रण में आ जाएगी. तब जाकर भारत सच्चे अर्थों में ऋषि-मुनियों, योगियों और संतों की धरती बनेगा.

अपनी भावी योजनाओं के बारे में कुछ बताइये?

सबसे पहले तो मैं श्री श्री आयुर्वेद के लिए एग्रेसिव मार्केटिंग की प्लानिंग कर रहा हूं. हमारा लक्ष्य पतंजलि को पीछे छोड़ना है. इस समय देश में श्री श्री आयुर्वेद के सिर्फ 1700 फ्रेंचाइजी स्टोर्स हैं, इस साल के अंत तक उनकी संख्या बढ़ाकर 2500 करनी है.

आपने अपनी योग पद्धति के नाम में सुदर्शन शब्द क्यों जोड़ा है?

मैंने सोचा था कि यह शब्द सुदर्शन चक्र का काम करेगा और आस-पास किसी प्रतिद्वंदी, अब्ब्ब... मेरा मतलब किसी भी तरह की नकारात्मकता को फटकने नहीं देगा.

आर्ट ऑफ लिविंग क्या है?

पतंजलि के मुकाबले श्री श्री आयुर्वेद के लगातार पिछड़ने के बीच भी मुस्कुराते रहने की कला ही आर्ट ऑफ लिविंग है.

कुछ समय पहले आपने कहा था कि आप राम मंदिर के निर्माण के लिए मेडिटेशन करने को तैयार हैं. क्या मेडिटेशन का मंदिर निर्माण में भी कोई रोल है?

हां बिल्कुल, मेडिटेशन मंदिर निर्माण में भी बहुत सकारात्मक असर करेगा. इससे मंदिर जल्दी और शांतिपूर्ण ढंग से बन जाएगा.

मेडिटेशन से मंदिर निर्माण! वो तो इंसानों के लिए होता है न?

देखिये, मेडिटेशन सजीव-निर्जीव, सूक्ष्म-स्थूल, हर एक चीज को फायदा पहुंचाता है. अभी कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि राम मंदिर का विवाद कोर्ट से बाहर ही सुलझा लेना चाहिए. मेरा तो कहना है कि मेडिटेशन की मदद से मंदिर का निर्माण कराया जाना चाहिए. यदि मंदिर निर्माण क्षेत्र के तीन किलोमीटर के दायरे में बड़ी संख्या में लोग मेडिटेशन करेंगे, तो निश्चित तौर पर वहां मंदिर का निर्माण जल्दी होगा.

आपका एक सूक्ति वाक्य है, ‘ऐसा ज्ञान बोझ है, जो आपको महसूस कराता है कि आप विशेष हैं’, फिर आपने इतने ज्ञानवान होकर अपने नाम के आगे दो बार श्री क्यों लगा रखा है?

(थोड़ा असहज होकर) अब्ब्ब...मैंने खुद को विशेष मानने के कारण दो बार श्री श्री नहीं लगाया है. इसके पीछे गहरा विचार है. आप जानती होंगी कि हमारे यहां पुरुषों के नाम से पहले श्री लगाने की परंपरा है. तो इन दो में से पहला श्री तो वह है जो कि किसी भी आम आदमी के नाम के आगे लगता है. दूसरा श्री मैं एक मानवतावादी धर्मगुरू होने के नाते लगाता हूं.

क्या मतलब?

देखिए, आज के जमाने में नई पीढ़ी ने नाम से पहले श्री और श्रीमती बोलना छोड़ दिया है. पहला श्री मैं दुनियाभर के उन तमाम पुरुषों के बदले लगाता हूं, जिनके नाम से पहले श्री नहीं बोला जा रहा है.

अच्छा यह बताइये, आप 60 साल के हो चुके हैं, लेकिन आपके बाल और दाढ़ी अभी तक काले हैं. यह प्राकृतिक रूप से काले हैं या आप डाई करते हैं ?

देखिये, इस सवाल का जवाब देकर मैं किसी हेयर कलर कंपनी का प्रचार नहीं करना चाहता.