केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने एच-1बी वीजा मुद्दे पर अमेरिका की संभावित सख्ती को वहां के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के सामने उठाया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका कोई भी निर्णय लेने से पहले भारतीय पेशेवरोंं के वहां की अर्थव्यवस्था में दिए गए योगदान का ख्याल रखे. वहीं सूत्रों के अनुसार, रॉस ने भारत को आश्वासन दिया है कि अमेरिका इस मुद्दे पर फिर से विचार करेगा.

वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ‘वित्त मंत्री ने हालिया कार्यकारी आदेशों के तहत एच-1बी वीजा प्रणाली पर सख्ती के संकेत देने वाले मुद्दे को उठाया. उन्होंने भारतीय पेशेवरों के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान को बताया और उम्मीद जताई कि अमेरिका कोई भी निर्णय लेने से पहले इन पहलुओं का ख्याल रखेगा.’ अरुण जेटली इन दिनोंं आईएमएफ और विश्व बैंक की बैठकों में भाग लेने के लिए अमेरिका के पांच दिवसीय दौरे पर हैं. डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच कैबिनेट स्तर की यह पहली मुलाकात है.

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ अभियान के तहत अमेरिकियों के रोजगार की रक्षा करने वाले कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए थे. सरकार की दलील है कि एच-1 बी वीजा का दुरुपयोग रोकने के लिए ऐसा किया गया. इसका सबसे बड़ा नुकसान भारतीय आईटी उद्योग को होगा क्योंकि एच-1 बी वीजा पाने वालों पेशेवरों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही है. अमेरिका जाने से पहले जेटली ने भी पत्रकारों से कहा कि आईटी इंडस्ट्री की चिंता है कि यदि ट्रंप सरकार ने वीजा में कटौती कर दी तो उनका कारोबार काफी प्रभावित होगा.

इससे पहले कल, भारतीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका को डब्ल्यूटीओ में किए गए उसके वादे की याद दिलाते हुए मांग की थी कि वह इस वादे को पूरा करे. उन्होंने कहा कि अब केवल अमेरिका ही नहीं कई दूसरे देश भी ऐसे प्रतिबंधात्मक कदम उठा रहे हैं. अभी कुछ दिनों पहले आॅस्ट्रेलिया ​ने अस्थायी काम के लिए वीजा कार्यक्रम को समाप्त करने की घोषणा कर दी.

वाणिज्य मंत्री ने अमेरिका को चेताते हुए कहा कि वीजा पर सख्ती करने से न केवल भारतीय कंपनियां बल्कि भारत में लंबे समय से काम कर रहीं अमेरिकी कंपनियां भी बुरी तरह से प्रभावित होंगी. उन्होंने कुशल पेशेवरों की शरणार्थियों से तुलना करने को गलत बताते हुए कहा कि वे इसका विरोध करती हैं.