दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव को वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) वालीं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से चुनाव कराने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दिया. यह याचिका दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लगाई थी. इसमें एमसीडी चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम को पुराना और असुरक्षित बताया गया था. हाईकोर्ट में राज्य चुनाव आयोग ने एमसीडी चुनाव में इस्तेमाल की जा रही मशीनों को हर लिहाज से सुरक्षित बताया.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक दिन के भीतर 13,000 ईवीएम को बदल पाना मुश्किल है, इसलिए मौजूदा ईवीएम से ही चुनाव कराना बेहतर होगा. एमसीडी चुनाव 23 अप्रैल को होना है.

वीवीपीएटी एक तरह का प्रिंटर होता है, जिसे ईवीएम से जोड़ा जाता है. इससे मतदान के बाद संबंधित पार्टी के चुनाव चिह्न वाली एक पर्ची निकलती है, जिसे देखकर मतदाता यह जान सकता है कि उसने जिसे वोट दिया है, वोट उसे मिला है या नहीं. मतदाता को पर्ची को देखने के लिए सात सेकेंड का समय मिलता है. इसके बाद यह पर्ची एक डिब्बे में जमा हो जाती है. इसका इस्तेमाल मतगणना संबंधी विवादों को दूर करने में किया जा सकता है.

मार्च में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद से राजनीतिक दल ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं. इन आरोपों को देखते हुए चुनाव आयोग ने ईवीएम से छेड़छाड़ साबित करने की खुली चुनौती दी है. इस बीच, केंद्रीय कैबिनेट ने 2019 का चुनाव वीवीपीएटी युक्त ईवीएम मशीन से कराने के लिए जरूरी वीवीपीएटी मशीनों की खरीद संबंधी चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.