अंग्रेजी में एक कहावत है - ब्रेक द बैंक. इसका मोटा-मोटा मतलब है, किसी मकसद के लिए सारे संसाधनों का इस्तेमाल कर लेना. ऐसा लगता है कि इस कहावत का जन्म गुल्लक में बचत के पैसे जोड़ने और जरूरत पड़ने पर उसे तोड़ देने के चलते ही हुआ होगा. गुल्लक यानी पैसे जमा करने का वह बर्तन जिसका एक संबंध बच्चों से भी जुड़ता है. हमारे घर-परिवारों में अक्सर बच्चों को यह तोहफे में दी जाती हैं. इसकी एक वजह तो यह है कि गुल्लक अलग-अलग जानवरों या वस्तुओं के रंग-बिरंगे खिलौने जैसे दिखाई देती हैं, इसलिए बच्चों को पसंद आती हैं. दूसरी बात यह भी कि इनके जरिए धीरे-धीरे बच्चों में बचत की आदत डलवाने की कोशिश की जाती है.

इस बात पर आपने भले ही कभी ध्यान न दिया हो, लेकिन यह अपने आप में रोचक है कि गुल्लक सबसे ज्यादा जिस जानवर की आकृति में दिखाई देती हैं, वह बच्चों को प्यारा लगने वाला खरगोश या कुत्ता नहीं बल्कि सुअर है. सुअर की आकृति में बनने वालीं ये गुल्लक दुनियाभर में पिगी बैंक के नाम से मशहूर हैं. आज पिगी बैंक इतने लोकप्रिय हैं कि बचत के प्रतीक बन गए हैं. यहां तक कि तमाम बैंक भी बचत से जुड़ी अपनी स्कीम का विज्ञापन देते हुए अक्सर इनका इस्तेमाल करते नजर आते हैं. आमतौर पर लोगों को नापसंद आने वाला यह जानवर बचत का इतना बड़ा प्रतीक कैसे बन गया? क्यों ज्यादातर गुल्लक इस आकृति की होती हैं? पिगी बैंक में पैसे बचाकर रखने का चलन कब और कहां से शुरू हुआ? चलिए जानते हैं.

इन सवालों का जवाब जानने से पहले बचत के इतिहास पर एक नजर डाल लेते हैं. शताब्दियों पहले मुद्रा के अस्तित्व में आने के साथ बचत भी किसी न किसी रूप में रही ही होगी. पहले धातु की जगह मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल किए जाते थे. इसलिए बचत की शुरूआत से जुड़े ज्यादातर किस्सों से पता चलता था कि लोग रसोई में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों में ही पैसे बचाकर रख लिया करते थे. धीरे-धीरे यह चलन एक जरूरत बन गया और बचत करने के लिए खास तरह के बर्तन बनाए जाने लगे. इनमें ऊपर एक छेद होता था, जिससे सिक्के सिर्फ डाले जा सकते थे. बिना तोड़े इनमें से सिक्के निकालना तकरीबन नामुमकिन होता था. ऐसे बर्तनों को ही गुल्लक, पेनी बैंक या मनी बैंक कहा गया. पिगी बैंक इसी का एक प्रकार हैं.

यहां पर आपको यह बता देते हैं कि पिगी बैंक का यह नाम पड़ने के पीछे कोई सटीक कारण नहीं मिलता. इस बारे में सिर्फ कुछ धारणाएं हैं. इनमें से पहली धारणा कहती है कि ऐसा भाषा विकास के क्रम में हुए एक बदलाव से जुड़ी गलतफहमी के चलते हुआ. विदेशों में गुल्लक जिस विशेष पीले या नारंगी रंग की मिट्टी से बनाई जाती थीं, उसे पग (Pygg) कहा जाता था. इसी आधार पर गुल्लकों को पग जार या पग पॉट नाम दिया गया. रोजाना के काम में इस्तेमाल होने वाले बर्तन जिस मिट्टी के होते हैं, पग वह मिट्टी नहीं होती थी. दरअसल इससे मजबूत बर्तन नहीं बनाए जा सकते थे. इस तरह गुल्लक बनाने के लिए यह मिट्टी सबसे सही थी, क्योंकि पैसों की जरूरत पड़ने पर आखिरकार पग पॉट को टूटना ही होता था.

पग (Pygg) शब्द पर वापस लौटें तो पता चलता है कि अंग्रेजी भाषा-लिपि के विकास के शुरूआती दौर में ‘वाई’ अक्षर को स्वर ‘अ’ की तरह इस्तेमाल किया जाता था. बाद में इसके लिए ‘ए’ के साथ-साथ ‘यू’ अक्षर का इस्तेमाल किया जाने लगा और ‘वाई’ का उपयोग स्वर ‘इ’ के लिए निर्धारित कर दिया गया. इस बदलाव के चलते 18वीं सदी आते-आते पग शब्द पिग बोला जाने लगा. गफलत कुछ और आगे बढ़ी. अब यह पिग (pygg) न रहकर, दूसरा पिग (pig) समझा जाने लगा. ‘पग जार’ भी बदलकर ‘पिगी जार’ या ‘पिगी बैंक’ हो गया. यानी कि उच्चारण में पैदा हुए इसी भ्रम के चलते कुछ लोगों ने इस पिगी बैंक को पिग यानी सुअर से जोड़कर देखा होगा और गुल्लकों को सुअर की आकृति में बनाया जाने लगा होगा. फिर समय के साथ पिगी बैंक गुल्लक या मनी बैंक का पर्याय बन गए.

एक अन्य मान्यता के हिसाब से पिगी बैंक का संबंध चीन के क्विंग राजवंश से जोड़ा जाता है. बताया जाता है कि क्विंग राजवंश के शासनकाल में सुअर धन और संपन्नता का प्रतीक समझा जाता था. इसीलिए सुअर के आकार वाले गुल्लक लोगों में आसानी से लोकप्रिय हो गए.

कुछ पश्चिमी इतिहासकारों की मानें को पिगी बैंक सदियों पुराना है और पहला पिगी बैंक ईसा पूर्व दूसरी सदी में बनाया गया था. इतिहासकारों का एक बड़ा तबका मानता है कि पिगी बैंक सबसे पहले इंडोनेशिया में पाया गया. इसके लिए इंडोनेशिया और जावा में ‘केलेंगन’ या ‘सेलेंजन’ (सही उच्चारण उपलब्ध नहीं है) टर्म इस्तेमाल की जाती है. इसका मतलब होता है जंगली सुअर के समान और इन इलाकों में मनी या पिगी बैंक के लिए भी यही शब्द इस्तेमाल किया जाता था. इस आकार में मिले ज्यादातर बर्तन चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के बताए जाते हैं. इतने सालों का सफर तय करने का बाद पिगी बैंक का इतना लोकप्रिय होना स्वाभाविक है.