भाजपा नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में आपातकाल घोषित करने का सुझाव दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘मेरी राय है कि इस वक्त सुकमा और छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों में संविधान के अनुच्छेद-352 को लागू कर देना चाहिए जिसका मतलब आपातकाल है.’ युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर अनुच्छेद-352 के तहत आपातकाल लगाया जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक सुब्रमण्यम स्वामी ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में आपातकाल लगाने के अलावा सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) को भी प्रभावी बनाने की सलाह दी है. उन्होंने यह भी कहा कि माओवादियों के खिलाफ कुछ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे उन्हें अपनी गलती पर पछताना पड़े.

सोमवार को सुकमा में हुए नक्सली हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 25 जवान शहीद हो गए थे. यह अप्रैल 2010 के बाद सीआरपीएफ पर सबसे घातक हमला है. केंद्र सरकार ने इसे ठंडे दिमाग से की गई बर्बर कार्रवाई बताया है और सीआरपीएफ से रिपोर्ट मांगी है. वहीं, मंगलवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में घायल जवानों को देखने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा. उन्होंने सीआरपीएफ महानिदेशक और गृहमंत्रालय के सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार को छत्तीसगढ़ में रुकने और सुकमा में नक्सलियों के खिलाफ रणनीति बनाने का भी निर्देश दिया.

इस घटना के बाद विपक्ष ने नक्सल समस्या को लेकर केंद्र पर हमले तेज कर दिए हैं. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार की नक्सल समस्या से निपटने की नीति को विफल बताया है. वहीं, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि केंद्र सरकार नक्सल समस्या को संभालने में नाकाम साबित हुई है. दो महीने से ज्यादा समय से डीजी सीआरपीएफ का पद रिक्त रहने पर चिंता जताते हुए उन्होंने नक्सल समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग रणनीति के साथ काम करने का सुझाव दिया.