डॉलर की तुलना में रुपए की मजबूती का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा. बाजार बंद होते वक्त एक डॉलर की कीमत 64.11 रुपए रही हालांकि एक समय यह 63.93 के स्तर तक चला गया था. मंगलवार को रुपया 64.26 और सोमवार को 64.44 के स्तर पर बंद हुआ था. बुधवार को रुपए में आई मजबूती 11 अगस्त 2015 के बाद सबसे अधिक है. उस दिन रुपया डॉलर के मुकाबले 63.33 पर था.

इस साल जनवरी से डॉलर की तुलना में रुपया अब तक करीब छह प्रतिशत मजबूत हो गया है. पहली जनवरी को एक डॉलर की कीमत करीब 68 रुपए थी. तब से इसमें लगभग चार रुपए की मजबूती आई है. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई वजहों से डॉलर की तुलना में रुपए में तेजी जारी रह सकती है. उनके मुताबिक हो सकता है रुपया डॉलर की तुलना में 60 रुपए के स्तर तक चला जाए.

जानकारों के अनुसार, अन्य विदेशी मुद्राओं की तुलना में डॉलर का कमजोर होना और देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने से रुपए की मांग बढ़ रही है. देश की अर्थव्यवस्था का सुधरना और शेयर बाजार का मजबूत​ होना भी इसकी वजहों में शामिल हैं. बीते कुछ हफ्तों से निर्यातक और बैंक जोरों से डॉलर की बिकवाली कर रहे हैं. इस वजह से भी डॉलर कमजोर हुआ हुआ है.

कारो​बारियों को यह भी उम्मीद है कि आने वाले समय में रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग सुधार सकती हैं. इससे देश में विदेशी निवेश में और बढ़ोतरी होगी जिससे डॉलर का महत्व घटेगा. दो दिन पहले आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने न्यूयॉर्क में संकेत दिए कि ब्याज दरों में कटौती के बजाए वृद्धि हो सकती है. इस कदम से भी बाजार में रुपए का प्रवाह कम होने का अनुमान है. ऐसे में अगले कुछ महीनों में रुपए की मजबूती बनी रहने की संभावना है.

रुपए की मजबूती के नतीजे क्या होंगे?

रुपए की मजबूती से देश के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ता है जबकि ​आयात होने वाले सामान इससे सस्ते हो जाते हैं. ऐसे में निर्यात पर निर्भर रहने वाले जूलरी, कपड़े और हैंडीक्रॉफ्ट जैसे उद्योगों पर इसके नकरात्मक असर होंगे. वहीं कच्चा तेल, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कार सहित अनेक उपभोक्ता सामान सस्ते होंगे. दाल और खाने के तेल की कीमतें भी गिर सकती हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब दो तिहाई कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. देश मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों का भी बड़े पैमाने पर आयात करता है. कई कार कंपनियां अपनी कार के अधिकांश कल-पुर्जों के लिए आयात पर ही निर्भर हैं. दाल और खाद्य तेल भी बड़े पैमाने पर आयात किए जाते हैं.