वे डेल स्टेन या मिचेल स्टार्क नहीं हैं जो अपनी गति से बल्लेबाजों को चकमा दे दें. न ही वे ट्रेंट बोल्ट हैं जो तेज गति के साथ सीम का इस्तेमाल कर गेंद को हवा में तैराने का माद्दा रखते हों. वे धीमे, मध्यम गति के गेंदबाज हैं जिन्होंने अपनी क्षमताओं के अंदर ही अलग तरह का हुनर पैदा कर लिया है. यह गेंदबाज तब विकेट निकालता है जब उसके कप्तान को विकेट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.

‘मैं उसे आईपीएल के इतिहास का सबसे अच्छा गेंदबाज मानता हूं.’ पिछले दिनों आईपीएल के एक मैच के बाद ये शब्द दुनिया में सर्वाधिक विकेट लेने वाले श्रीलंकाई गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन ने कहे थे. वे जिस गेंदबाज की बात कर रहे हैं वह कोई और नहीं बल्कि भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार हैं. मुथैया मुरलीधरन के बारे में कहा जाता है कि वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जो सार्वजनिक रूप से किसी की भी तारीफ या आलोचना नहीं करते. लेकिन भुवनेश्वर कुमार के प्रदर्शन ने उन्हें अपना रुख बदलने के लिए मजबूर कर दिया.

पिछले आईपीएल से लेकर इस बार के आईपीएल तक अगर किसी गेंदबाज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो वह भुवनेश्वर कुमार ही हैं. सन राइजर्स हैदराबाद के इस गेंदबाज ने पिछले साल आईपीएल में सबसे ज्यादा 23 विकेट लेकर पर्पल कैप अपने नाम की थी. इस बार भी वे नौ मैचों में 20 विकेट ले चुके हैं और पर्पल कैप किसी और को देने को तैयार ही नहीं हैं.

टी20 के खेल में अक्सर देखा जाता है कि बल्लेबाज मैच के अंत में दूसरी टीम के जबड़े से मैच निकाल कर ले जाता है लेकिन, भुवनेश्वर के मामले में ठीक इसका उल्टा देखने को मिलता है. पिछले कई मैचों में देखा गया है कि भुवनेश्वर डेथ ओवर यानी मैच के अंतिम ओवरों में अपनी बेहतरीन गेंदबाजी से बल्लेबाजों को पस्त कर अपनी टीम को मैच जिता देते हैं.

पिछले हफ्ते आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच हुए ऐसे ही एक मैच में उन्होंने डेथ ओवरों में हैरतअंगेज गेंदबाजी कर सभी को चौंका दिया. हैदराबाद में हुए इस मैच में सनराइजर्स की टीम ने पंजाब को 159 का स्कोर दिया था. हालांकि, बल्लेबाजी करते हुए पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही लेकिन, फिर भी उसके बल्लेबाज मनन बोहरा (50 गेंद में 95 रन) ने मैच को जीतने की स्थिति में पहुंचा दिया था. एक समय पंजाब को चार ओवर में मात्र 30 रन चाहिए थे और उसके 6 बल्लेबाज ही आउट हुए थे. मनन एक छोर संभाले हुए थे. 17वें ओवर में भुवनेश्वर गेंदबाजी करने आए और उन्होंने किफायती गेंदबाजी करते हुए मोहित शर्मा का विकेट ले लिया. इसके अगले ओवर में मनन बोहरा ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए पंजाब का स्कोर 18 ओवर में 144 पहुंचा दिया. लेकिन, इसके बाद 19वें ओवर में एक बार फिर भुवनेश्वर को गेंद दी गई और यहीं से उन्होंने मैच का पासा पलट कर रख दिया. उन्होंने इस ओवर की पहली गेंद पर बल्लेबाज केसी करियप्पा को आउट किया और तीसरी गेंद पर मनन बोहरा को एल्बीडब्ल्यू कर पंजाब के जबड़े से जीत छीन ली. इस मैच में भुवी ने हाशिम अमला, ग्लेन मैक्सवेल और मनन बोहरा सहित पांच बल्लेबाजों को आउट किया.

गेंदबाजी में किए बड़े बदलाव

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी आकाश चोपड़ा भुवनेश्वर को छोटे फ़ॉर्मेट का मास्टर गेंदबाज बताते हैं. एक साक्षात्कार में वे कहते हैं, ‘भुवी की ख़ास बात यह है कि वे खुद अपनी कमियों और सीमाओं को बहुत अच्छे से जानते हैं और इन सीमाओं के अंदर ही अपनी कमियों को दूर करने में कामयाब हुए हैं.’ वे यह भी बताते हैं कि आईपीएल में भुवनेश्वर कुमार को हमेशा दो ओवर शुरुआत में और दो ओवर अंत में डालने होते हैं. शुरू में तो वे स्विंग से विकेट निकाल लेते थे लेकिन बाद के ओवरों में यानी पुरानी गेंद से वे सफल नहीं हो पाते थे. लेकिन, पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपनी इसी कमी को दूर करने के लिए गेंदबाजी में कई बड़े और आश्चर्यजनक बदलाव किये हैं. उन्होंने अपनी पुरानी मजबूती यानी स्विंग गेंदबाजी के साथ ही अब सटीक यॉर्कर डालना सीखा है. आकाश के मुताबिक भुवनेश्वर के सटीक यार्कर डालने से डेथ ओवरों में भी उनकी गेंदबाजी चमक गई है. आकाश मुस्कराते हुए कहते हैं, ‘भुवनेश्वर की तुलना तो पूरी एक टीम से की जा सकती है. उन्होंने इस आईपीएल के शुरूआती पांच मैचों में 108 रन देकर 15 विकेट लिए जबकि, गुजरात के सभी गेंदबाजों ने मिलकर इतने विकेट लेने के लिए 700 से ज्यादा रन दे डाले.’

हाल में एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में भुवनेश्वर ने भी इस बात को माना कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी में बड़े बदलाव किये हैं. उनके मुताबिक उन्होंने सबसे बड़ा बदलाव अपनी गेंद फेंकने की गति में किया है . वे कहते हैं कि पहले वे 125 किमी/घंटा की गति से गेंदबाजी करते थे लेकिन गति पर विशेष ध्यान देने के बाद वे इस आईपीएल में लगातार 130-140 किमी/घंटा की गति से गेंद फेंकने में कामयाब हुए हैं. मैच के शुरूआती ओवरों में नई गेंद से स्विंग हो या डेथ ओवरों में यार्कर, इस गति से बल्लेबाजों को गेंद का सामना करने में काफी ज्यादा दिक्कत आती है. भुवनेश्वर आईपीएल जैसे टूर्नामेंट को धन्यवाद देते हुए कहते हैं, ‘यह आईपीएल ही है जिसने मुझे इतने बड़े बदलाव करने के लिए मजबूर कर दिया.’

डेथ ओवर में विकेट लेने का राज

पिछले साल और इस साल के आईपीएल को मिलाकर देखें तो भुवी ने 23 मैचों में 38 विकेट लिए हैं और इन मैचों में उनका स्ट्राइक रेट 7 से कम का रहा है. इन 38 विकेटों में ख़ास बात यह है कि इनमें से 23 विकेट उन्होंने डेथ ओवरों में हासिल किए हैं जो अन्य कोई गेंदबाज नहीं कर पाया है. क्रिकेट विश्लेषक हर्षा भोगले इसका कारण भुवनेश्वर और अन्य गेंदबाजों की सोच में एक बड़े अंतर को मानते हैं. एक साक्षात्कार में वे कहते हैं, ‘आईपीएल में जहां डेथ ओवरों में अन्य गेंदबाज केवल रन न देने के बारे में ही सोचते हैं वहीं, भुवनेश्वर उस समय भी क्रिकेट के सबसे पुराने तरीके को आजमाते हैं जो कहता है कि विकेट लो, बल्लेबाज पैवेलियन में रन नहीं बना सकता.’ हर्षा बताते हैं कि डेथ ओवरों में अन्य गेंदबाज स्लो और तमाम तरह की तकनीक अपनाते हैं लेकिन, भुवी 130 किमी/घंटा से ऊपर की रफ़्तार से यार्कर डालने की ही कोशिश करते हैं और अंतिम ओवरों में भी विकेट लेने में कामयाब हो जाते हैं.

क्रिकेट के कुछ जानकार कहते हैं कि आईपीएल में पिछले पांच सीजन तक श्रीलंकाई गेंदबाज लसिथ मलिंगा सबसे सफल तेज गेंदबाज माने जाते रहे. इसका मुख्य कारण केवल यह था कि जब कभी उनके कप्तान को विकेट चाहिए होता था तो मलिंगा उन्हें विकेट निकाल कर देते थे. मलिंगा भी अंतिम ओवरों में सटीक यार्कर ही डालते थे जिससे बल्लेबाज रन बनाना तो दूर बल्कि अपना विकेट ही गंवा बैठता था. इन लोगों के मुताबिक आज भुवनेश्वर कुमार भी अपनी टीम के लिए यही काम कर रहे हैं. ये लोग कहते हैं कि भुवनेश्वर ने अब जिस तरह की गेंदबाजी करना शुरू किया है वह ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की पिचों पर बल्लेबाजों को काफी ज्यादा परेशान करने वाली है. जानकारों के मुताबिक अब इस बात में कोई संदेह नहीं कि आने वाले समय में भारतीय टीम के लिए भुवनेश्वर कुमार तुरुप का इक्का साबित होने वाले हैं.