पतंजलि का आंवला जूस असुरक्षित पाया गया, सेना ने अपनी कैंटीन में बिक्री रोकी | सोमवार, 24 अप्रैल 2017

सेना ने अपनी कैंटीन में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के आंवला जूस की बिक्री पर रोक लगा दी है. द इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार सेना ने इसके असुरक्षित होने की रिपोर्ट आने के बाद यह कदम उठाया है. सेना के कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी) ने अपने सभी डिपो से पतंजलि आंवला जूस के मौजूदा भंडार की जानकारी मांगी है, ताकि इसे लौटाया जा सके. सीएसडी इस समय लगभग 1.2 करोड़ सैनिकों, उनके परिजनों और पूर्व सैनिकों को लगभग 5,300 उत्पादों की बिक्री करती है, जिसमें बिस्किट से लेकर कार तक शामिल है.

आंवला जूस पतंजलि के उन शुरुआती उत्पादों में शामिल है, जिसके सहारे कंपनी इस व्यवसाय में उतरी थी. रिपोर्ट के मुताबिक नाम न जाहिर करने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि पतंजलि के आवंला जूस के एक बैच की जांच कोलकाता स्थित सेंट्रल फूड लैब में हुई, जिसने इसे सेवन के लिए असुरक्षित घोषित किया है. उन्होंने यह भी कहा कि पतंजलि ने भी सीएसडी से आंवला जूस को वापस लेने का फैसला किया है. हालांकि, इस बारे में सीएसडी और पतंजलि का कोई जवाब नहीं मिल पाया है. कोलकाता स्थित इसी लैब ने दो साल पहले नेस्ले की मैगी में लेड की ज्यादा मात्रा होने की रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद उसे अपना ब्रांड वापस लेना पड़ा था.

छत्तीसगढ़ : नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद | मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सोमवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कम से कम 25 जवान शहीद हो गए हैं. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये सभी जवान सड़क खाली कराने के लिए गश्त पर निकले थे और नक्सलियों की भारी गोलीबारी की चपेट में आ गए. उन्होंने बताया कि इस हमले में सात जवान घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है जिन्हें हेलिकॉप्टर से रायपुर लाया गया है.

खबरों के मुताबिक सीआरपीएफ जवानों और माओवादियों के बीच यह मुठभेड़ दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे बुरकापाल-चिंतागुफा इलाके में हुई. ये सभी जवान सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन से जुड़े हैं. इसे अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा जिले में सीआरपीएफ पर नक्सली हमले के बाद सबसे घातक हमला माना जा रहा है, जिसमें 76 जवान शहीद हो गए थे.

मालेगांव मामले में साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिली लेकिन लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को राहत नहीं | बुधवार, 26 अप्रैल 2017

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मालेगांव बम धमाके से जुड़े मामले में मंगलवार को साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत दे दी है. यह जमानत सशर्त है. साध्वी प्रज्ञा को इसके एवज में अपना पासपोर्ट एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कोर्ट में जमा कराना होगा. साथ ही पांच लाख रुपए की जमानत भी अदा करनी होगी. हालांकि इसी मामले के एक अन्य आरोपित लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को कोर्ट ने राहत नहीं दी है.

जस्टिस रंजीत मोरे और शालिनी फणसलकर जोशी की बेंच ने अपने फैसले में कहा, ‘पहली नजर में साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.’ इस मामले की जांच करने वाली एजेंसी- एनआईए के वकील संदेश पाटिल ने कोर्ट में दलील दी कि इस ‘मामले में दायर आरोप पत्रों से यह तथ्य स्थापित होता है कि पुरोहित इस धमाके की साजिश में शामिल थे. उन्होंने न सिर्फ इससे जुड़ी बैठकों में हिस्सा लिया, बल्कि भड़काऊ भाषण भी दिए. साथ ही, धमाके के लिए विस्फोटक आदि का इंतजाम करने पर भी राजी हुए.’

केंद्र सरकार के पास लोकपाल कानून लागू करने में देरी की कोई वजह नहीं है : सुप्रीम कोर्ट | गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

सुप्रीम कोर्ट ने जल्द से जल्द ‘लोकपाल’ को नियुक्त करने का समर्थन किया है. गुरुवार को शीर्ष अदालत ने कहा, ‘लोकपाल कानून काम करने लायक है और ऐसी कोई वजह नहीं कि केंद्र सरकार इसे लागू करने में देरी करे.’ डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक जस्टिस रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की बेंच ने आगे कहा, ‘लोकपाल कानून को लटकाए रखने के बारे में केंद्र सरकार के पास कोई तर्क नहीं है.’

गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज की तीन साल पुरानी जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि लोकपाल नियुक्त करने के लिए इसके कानून में संशोधन का इंतजार करने की जरूरत ही नहीं है. इस याचिका में सरकार पर लोकपाल नियुक्त करने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया गया था. अदालत ने इस मामले में 28 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इस मामले में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि लोकपाल कानून के तहत नेता प्रतिपक्ष की परिभाषा में संशोधन विधेयक संसद में लंबित है, इस वजह से नियुक्ति में देरी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा था कि न्यायपालिका, विधायिका को कानून बनाने के लिए निर्देशित नहीं कर सकती है. लोकपाल कानून के तहत लोकपाल चयन समिति में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को शामिल किया गया है. लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस को पर्याप्त सीटें नहीं मिल पाई थीं. इसके आधार पर उसके नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला. इसके चलते चयन समिति का गठन नहीं हो पा रहा है.

हरियाणा के जमीन सौदे से रॉबर्ट वाड्रा ने गलत तरीके से 50 करोड़ का मुनाफा कमाया : ढींगरा आयोग | शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने 2008 में हरियाणा में किए गए जमीन के एक सौदे में गलत तरीके से 50.5 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया. वह भी एक पैसा लगाए बिना. इस मामले की जांच के लिए हरियाणा की मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा मई 2015 में गठित किए गए जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग की जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है.

द इकनॉमिक टाइम्स ने विश्वस्त सूत्रों के जरिए ढींगरा रिपोर्ट के ऐसे कुछ अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्षों की जानकारी हासिल की है. आयोग की रिपोर्ट को नजदीक से देखने वाले सूत्रों ने अखबार को बताया, ‘वाड्रा की कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए कई स्तर पर मिलीभगत का पता चला है. इसी के मद्देनजर आयोग ने उन सभी सौदों और संपत्ति की जांच कराने की अनुशंसा की है, जिन्हें वाड्रा या उनके कारोबार के नाम पर खरीदा गया.’

आयोग की रिपोर्ट पिछले साल 31 अगस्त को पेश की गई थी. पिछले हफ्ते ही राज्य सरकार ने इसे सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया है. शीर्ष कोर्ट में दायर याचिका के जरिए वाड्रा के जमीन सौदों की जांच के लिए गठित ढींगरा आयोग की संवैधानिक वैधता पर कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्‌डा ने सवाल उठाया है. इसी पर सुनवाई के सिलसिले में राज्य सरकार ने जांच रिपोर्ट तलब की गई थी.

दुष्कर्म के आरोपी उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को जमानत देने वाले जज निलंबित | शनिवार, 29 अप्रैल 2017

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे और दुष्कर्म के आरोपी गायत्री प्रजापति को जमानत देने वाले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्र को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया है. लखनऊ की विशेष पॉक्सो (बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला कानून) अदालत में सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए मिश्र ने मंगलवार को प्रजापति और दो अन्य की जमानत मंजूर की थी.

मिश्र को उनके रिटायरमेंट के दो दिन पहले ही निलंबित करते हुए हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ विभागीय जांच भी बिठा दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल यह जांच करेंगे. हाईकोर्ट के महापंजीयक डीके सिंह ने इन आदेशों की पुष्टि की है. इससे पहले उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रजापति व अन्य को जमानत देने संबंधी आदेश पर भी रोक लगा दी थी. यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी. भोंसले ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया था.

सरकार ने महाधिवक्ता वीके शाही के मार्फत दायर याचिका में दलील दी थी कि सत्र अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया. इसके अलावा प्रजापति ने जमानत की मांग करते हुए जो दलील दी, वह भी झूठी है. उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है. जबकि उन पर छह मामले चल रहे हैं. लिहाजा, आरोपियों की जमानत रद्द की जाए.