सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के पीछे बड़ी साजिश की जांच न करने के आरोप पर सोमवार को सीबीआई से रिपोर्ट मांगी है. इस हत्याकांड के दोषी करार दिए जा चुके एजी पेरारिवलन की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि सीबीआई ने इसके पीछे की बड़ी साजिश की जांच नहीं की. उसने मांग की है कि कोर्ट इस मामले की अपनी देख-रेख में जांच कराए.

पेरारिवलन ने याचिका में आरोप लगाया है कि राजीव गांधी की हत्या में लिबरेशन टाइगर आॅफ तमिल ईलम यानी एलटीटीई के अलावा अन्य संगठन भी शामिल थे. पेरारिवलन का आरोप है कि हत्यारों की मदद करने वाले कई लोगों को बचाने के लिए सीबीआई ने उनके खिलाफ जांच को बीच में ही बंद कर दिया. इस याचिका पर वरिष्ठ जज जस्टिस रंजन गोेगोई की अध्‍यक्षता में सर्वोच्‍च न्‍यायालय की एक पीठ ने सुनवाई की. अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी.

राजीव गांधी की 26 साल पहले तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में 21 मई, 1991 को एक आत्‍मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी. इस मामले की सुनवाई करने वाले टाडा कोर्ट ने एजी पेरारिवलन को टाडा कोर्ट ने दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था. दया याचिका के निपटारे में हुई देरी के आधार पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी को सजा को उम्र कैद में बदल दिया था. इस कांड में पेरारिवलन के अलावा छह अन्य लोगों मुरुगन, संतन, नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन को दोषी करार दिया गया था.

नलिनी की सजा को राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी की अपील पर 2000 में उम्रकैद में बदल दिया गया था. मुरुगन, संतन और पेरारिवलन की सजा को 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दया ​याचिका पर देरी से फैसला करने के चलते उम्रकैद में बदल दिया. बाद में तमिलनाडु सरकार ने सातों दोषियों को सजा से मुक्त कर दिया. राज्य सरकार के ऐसे अधिकार पर मामला अभी भी सु्प्रीम कोर्ट में लंबित है.