दिल्ली नगर निगम चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए इस्तीफा देने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पार्टी आलाकमान ने अभयदान दे दिया है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पद से हटाने के बजाय उन्हें अपने तरीके से संगठन चलाने की छूट दे दी है.

सूत्रों के अनुसार अजय माकन ने मंगलवार को पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इस मुलाकात में राहुल गांधी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने का निर्देश दिया. जानकारों के अनुसार अजय माकन के पद पर बने रहने से साफ है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी दिल्ली में अजय माकन के अलावा किसी और नेता पर भरोसा नहीं करना चाहता. आलाकमान के इस फैसले से माकन विरोधी खेमे में गहरी निराशा बताई जा रही है.

जानकारों का मानना है कि माकन को यह अभयदान इसलिए मिला कि विधानसभा चुनावों की तुलना में नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरा है. 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल नौ प्रतिशत मत मिले थे और विधानसभा में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं पहुंच सका था. वहीं नगर निगम चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत 13 फीसदी बढ़कर कुल 22 प्रतिशत हो गया. हालांकि आलोचकों का कहना है कि इसके लिए अजय माकन का कुशल नेतृत्व नहीं बल्कि जनता में आम आदमी पार्टी के प्रति नाराजगी प्रमुख कारण है.

अजय माकन ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस के कार्यालय में तीनों निगमों के विजयी पार्षदों, हारे हुए प्रत्याशियों और सभी पूर्व विधायकों से मुलाकात की. बैठक में मौजूद सभी नेताओं का हौसला बढ़ाते हुए माकन ने कहा कि सभी जोरदार मेहनत करें ताकि दिल्ली के अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को विजय मिल सके. इस बैठक के बाद अजय माकन ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उनका इस्तीफा नामंजूर करते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बने रहने का आदेश दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि यह फैसला दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से बातचीत करके लिया गया.

अजय माकन ने बताया कि नगर निगम चुनाव में हार के बावजूद दिल्ली के लोगों में कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ा है. पार्टी में विरोधियों पर कड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, ‘हमने निगम चुनाव के सभी प्रत्याशियों से उनके सुझाव मांगे हैं ताकि पता चला सके कि किसने पार्टी हितों के खिलाफ काम किया.’ माकन ने बताया कि ऐसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

जानकारों ने बताया कि कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरने के बावजूद पार्टी नेताओं में इस बात को लेकर नाराजगी मौजूद है कि माकन लगातार विरोधी खेमों की उपेक्षा कर रहे हैं जिससे पार्टी में गुटबंदी और बढ़ रही है. उनके विरोधियों का यह भी आरोप है कि माकन ने इस्तीफा केवल इसलिए दिया कि वे अपना चेहरा बचा सकें. आलोचकों का मानना है कि ऐसे माहौल में अजय माकन के सामने आगे पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी.

अप्रैल में हुए दिल्ली के नगर निगम चुनावों के समय पार्टी की कलह खुलकर सामने आ गई थी. अजय माकन से नाराजगी के चलते पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व प्रमुख बरखा शुक्ला सिंह जैसे लोग कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. कांग्रेस छोड़ते वक्त दोनों ने अजय माकन पर निशाना साधा था.