राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, उसके लिए राजनीतिक हलचल भी तेज हो रही है. खबरों के मुताबिक, इस सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी पार्टियों के कई नेताओं से बात की है. कई अन्य से बात करने वाले हैं. उनकी कोशिश है कि सत्ताधारी एनडीए (भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के खिलाफ विपक्ष का महागठबंधन बनाया जा सके. हालांकि इन कोशिशों की सफलता पर शक जताने वाली खबरें भी साथ ही साथ सामने आ रही हैं.

द हिंदू ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालूप्रसाद यादव और समाजवादी पार्टी (सपा) के शीर्ष नेता मुलायम सिंह यादव से फोन पर बात की है. वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के महासचिव सीताराम येचुरी को फोन लगाया है.

पवार और येचुरी से सोनिया भी बात कर चुकी हैं. वे जनता दल यूनाइटेट (जेडीयू) के नेताओं- शरद यादव व नीतीश कुमार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के डी. राजा और बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक के संपर्क में भी हैं. वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेता एमके स्टालिन से भी मिलने वाली हैं.

इन सभी नेताओं से कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष एक ही आग्रह कर रहे हैं कि राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार उतारने के प्रस्ताव पर विचार करें. डेक्कन क्रॉनिकल ने भी ऐसी ही खबर दी है. सूत्रों ने अखबार को बताया है, ‘कांग्रेस इस बार विपक्ष को एकजुट करने के लिए सबसे अहम भूमिका निभाने जा रही है. क्योंकि पार्टी नेतृत्व को लगता है कि विचारधारा की लड़ाई में यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी है.’

हालांकि द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर बताती है कि विपक्ष का एक अहम घटक तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए का समर्थन दे सकता है. टीआरएस कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से नाराज है. सिंह ने हाल में ही कहा था, ‘तेलंगाना पुलिस ने बोगस वेबसाइट बनाई है, जो मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रही है. उन्हें आईएस (इस्लामिक स्टेट) का सहयोगी बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.’

इस बयान से नाराज टीआरएस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ‘एक तरफ जब कांग्रेस गैर-भाजपा दलों को एकजुट करने में लगी है, तब दिग्विजय को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए. उनके बयान का असर भविष्य में निश्चित रूप से दिखाई देगा. आगे होने वाले गठबंधनों पर भी इसका असर पड़ेगा.‘ हालांकि पार्टी सांसद और टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता कहती हैं, ‘अभी हमने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में फैसला नहीं किया है. इस पर पार्टी अध्यक्ष जल्द ही निर्णय लेंगे.’ टीआरएस के पास 17 सांसद और 82 विधायक हैं.