राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक शीर्ष अदालत ने लालू प्रसाद यादव और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश व अन्य धाराओं के तहत मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने और इसे नौ महीने में पूरी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर यह फैसला सुनाया है, जिसमें झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी.

झारखंड हाई कोर्ट ने 2014 में लालू प्रसाद यादव और अन्य को राहत देते हुए आपराधिक साजिश, विश्वास हनन और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कई आरोपों को हटा लिया था. इसके अलावा हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर किसी मामले में सजा मिल चुकी है, तो उन्हीं सबूतों और गवाहों के आधार पर दूसरी सुनवाई नहीं हो सकती.

हालांकि, सीबीआई की याचिका पर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और सभी पक्षों से अपनी राय लिखित में देने के लिए कहा था. चारा घोटाला 1990 से लेकर 1997 के बीच बिहार के पशुपालन विभाग द्वारा अलग-अलग जिलों में 1,000 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है. इस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे.

शीर्ष अदालत इस फैसले पर बिहार के विपक्षी दल भाजपा ने लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, ‘नीतीश जी भ्रष्टाचार से समझौता न करने की बात करते हैं, लेकिन उनका चारा घोटाले के दोषियों के साथ गठबंधन है जो बताता है कि बिहार में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है.’ वहीं, बिहार के भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अब लालू के पास सजा से बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है.