ऑनलाइन बातचीत को मजेदार बनाने वाले बीयर, बर्गर, स्माइली और नमस्ते जैसे इमोजी (प्रतीक) अब जल्द ही आप के नए पासवर्ड हो सकते हैं. बर्लिन विश्वविद्यालय और मिशिगन विश्वविद्यालय सहित कई संस्थाओं ने एक संयुक्त शोध परियोजना के बाद एक नया पासवर्ड सुरक्षा सिस्टम पेश किया है जो चार या छह अंक वाले पारंपरिक पासवर्ड सिस्टम (पिन) का विकल्प बन सकता है. इस नई प्रणाली में अंकों की जगह इमोजी का इस्तेमाल किया जाएगा. रिसर्च टीम की प्रमुख लीडिया क्रॉस के अनुसार ऐंड्रॉयड फोन के लिए तैयार की गई इस प्रणाली का नाम ‘इमोजी ऑथ’ यानी एमोजी ऑथेंटिकेशन है जो पुरानी प्रणाली की तुलना में कई गुना ज्यादा सुरक्षित और आसान है.

पिछले हफ्ते इस नई प्रणाली को रोम में पेश किया गया. रिसर्च से जुड़े अन्य लोगों के अनुसार उन्हें यह तरीका विज्ञान के कुछ सिद्धांतों से सूझा. दरअसल, यह बात साबित हो चुकी है कि इंसान का दिमाग डिजिटली नहीं, बल्कि चित्रात्मक रूप से काम करता है और यही कारण है कि लोग अक्सर अंकों से जुड़ी सूचनाएं जल्दी भूल जाया करते हैं. वहीं जो सूचनाएं छवियों या प्रतीकों के जरिए दी जाती हैं, वे ज्यादा समय तक याद रखते हैं. पासवर्ड भूलने के पीछे का कारण भी यही है. इन लोगों के मुताबिक यहीं से उन्हें इमोजी को पासवर्ड सिस्टम में इस्तेमाल करने की तरकीब सूझी.

सुरक्षा की दृष्टि से भी यह अंक प्रणाली की तुलना में कहीं बेहतर है. विशेषज्ञों के मुताबिक चार अंकों वाले पासवर्ड सिस्टम में कुल 10 अंकों से 7290 अलग-अलग तरह के पासवर्ड (जिनमें कोई एक अंक लगातार न आए) बनाए जा सकते हैं. जबकि, इमोजी के मामले में 3,498,308 अलग-अलग तरह के पासवर्ड बनेंगे क्योंकि अंकों की तुलना में इमोजी की संख्या काफी ज्यादा (44) है. साइबर सिक्योरिटी से जुड़े विश्लेषक भी मानते हैं कि इमोजी पासवर्ड सिस्टम चार या छह अंकों के पासवर्ड सिस्टम से कहीं ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि इसमें सेंध लगाना हैकरों के लिए भी आसान नहीं होगा.

फेसबुक ने चार राज्यों में एक्सप्रेस वाई-फाई की सेवा शुरू की

इंडोनेशिया, कीनिया, नाइज़ीरिया और तंजानिया के बाद फेसबुक ने भारत में भी अपनी एक्सप्रेस वाई-फाई सेवा लॉन्च कर दी है. फेसबुक साल 2015 से देश के कई इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर इस योजना का ट्रायल कर रहा था जिसके सफल होने के बाद पिछले हफ्ते कंपनी ने इसे हरी झंडी दिखा दी. फेसबुक के अधिकारियों के अनुसार अब यह सेवा चार राज़्यों- उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान और मेघालय में करीब 700 हॉटस्पॉट के जरिए व्यवसायिक तौर पर उपलब्ध करा दी गई है.

फेसबुक के अधिकारियों ने बताया कि कोई व्यक्ति साइनअप करके एक्सप्रेस वाई-फाई की सेवा का लाभ उठा सकता है. हालांकि, यूजर को इसके लिए निश्चित रकम भी चुकानी पड़ेगी. कंपनी की ओर से प्रतिदिन, साप्ताहिक और प्रतिमाह के हिसाब से अलग-अलग कीमत के डेटा पैक निकाले गए हैं जिन्हें स्थानीय एक्सप्रेस वाई-फाई रिटेलर से खरीदा जा सकता है.

फेसबुक के अनुसार एक्सप्रेस वाई-फाई का उद्देश्य स्थानीय भारतीय उद्यमियों को अपने गांव या क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा देकर व्यवसाय बढाने में मदद करना है. इस योजना के लॉन्च के दौरान फेसबुक ने एयरटेल के साथ अपनी साझेदारी का भी ऐलान किया है जिसके तहत एयरटेल और फेसबुक मिलकर अगले कुछ महीनों में देशभर में 20,000 नए एक्सप्रेस वाई-फाई हॉटस्पॉट लॉन्च करेंगे.

माइक्रोसॉफ्ट ने नया ‘विंडोज 10 एस’ ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किया

माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले हफ्ते विंडोज 10 एस नाम से एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) लांच किया है. यह विंडोज 10 का अपडेटेड वर्जन है. इसे विंडोज 10 की अब तक की कुछ कमियों को दूर करने, गूगल के तेजी से पॉपुलर हो रहे क्रोम ओएस से मुकाबला करने और मुख्य रूप से शिक्षण संस्थानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

विंडोज 10 एस अपनी दो विशेषताएं को लेकर काफी चर्चा में हैं. पहली इसकी स्पीड और दूसरी बैटरी लाइफ. इसे इस्तेमाल कर चुके कंप्यूटर एक्सपर्ट कहते हैं कि भले ही माइक्रोसॉफ्ट ने ‘एस’ का मतलब ‘सोल’ बताया हो लेकिन इसे चलाने के बाद ‘एस’ का मतलब स्पीड कहना ज्यादा सही लगता है. इनके मुताबिक विंडोज 10 एस मात्र 15 सेकंड में बूट हो जाता है. इसे उसी प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है जिस पर विंडोज 10 बना हुआ है. लेकिन, यह उससे कहीं ज्यादा हल्का (लाइटवेट) है जिस कारण यह कम क्षमता वाले और उन पुराने हार्डवेयर को भी सपोर्ट करता है जिन्हें विंडोज 10 नहीं करता.

बैटरी के मामले में माइक्रोसॉफ्ट ने इसे अपने अन्य ओएस से बेहतर बताया है. उसका दावा है कि इसके साथ यूजर के सिस्टम की बैटरी 14 घंटे तक भी चल सकती है. माना जाता है कि 10 एस में बैटरी बैकअप को लेकर माइक्रोसॉफ्ट काफी गंभीर था क्योंकि इस मामले में उसे मैक ओएस और गूगल के क्रोम ओएस से कड़ी टक्कर मिल रही है.

विंडोज 10 एस में कमियों की बात करें तो इसमें केवल इंस्टाल्ड ऐप्स और विंडोज स्टोर से डाउनलोड किए गए ऐप्स ही चलेंगे. कंपनी के मुताबिक ऐसा सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए किया गया है. हालांकि, कंपनी ने इस मामले में एक सहूलियत भी दी है. उसका कहना है कि अगर यूजर को वे ऐप्स इस्तेमाल करना है जो विंडोज स्टोर में उपलब्ध नहीं है तो ऐसी स्थिति में वह विंडोज 10 प्रो के लिए अपग्रेड कर सकता है.

माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार उसका यह ऑपरेटिंग सिस्टम इस साल के अंत तक मुफ्त में उपलब्ध है, लेकिन उसके बाद इसके लिए यूजर को 49 डॉलर चुकाने पड़ेंगे.