नोटबंदी के छह महीने बाद भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इससे जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है. खबर के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने एक आरटीआई आवेदन के जवाब में कहा है कि इसकी वजह से देश के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है. रिजर्व बैंक का कहना है कि ऐसा करने से केंद्र सरकार को अपनी आर्थिक और वित्तीय नीतियां लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के एक संवाददाता ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत रिजर्व बैंक को एक आवेदन किया था. इसमें आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी के ऐलान से पहले बुलाई आरबीआई बोर्ड की बैठक से जुड़ी जानकारियां मांगी गई थीं. इसके अलावा आवेदन में नोटबंदी के संबंध में केंद्रीय बैंक, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और वित्त मंत्रालय के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा देने के लिए भी कहा गया था.

आरबीआई ने सूचना के अधिकार कानून की धारा आठ (1) के हवाले से आवेदन में मांगी गई जानकारियां देने से इनकार कर दिया. यह धारा उन सूचनाओं को सार्वजनिक करने पर रोक लगाती है, जिनसे देश की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचने की आशंका हो. इस धारा के तहत रक्षा, कूटनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों और भारत के दूसरे देशों के साथ संबंधों पर बुरा असर डाल सकने वाली जानकारियां देने से भी मना किया जा सकता है.