लेफ्टिनेंट उमर फयाज़ की हत्या हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के स्थानीय आतंकियों ने की थी. इनकी अगुवाई अब्बास अहम भट नाम का आतंकी कर रहा था. वह इससे पहले दो हत्याओं में भी वांछित है. इनमें शोपियां के ही डॉक्टर मसूद अहमद की हत्या मामला भी है. डॉक्टर मसूद की हत्या निजी दुश्मनी के चलते की गई थी.

प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया है कि भट के साथ दो और स्थानीय लड़के थे. इनमें एक का नाम इशफाक़ अहमद ठोकर और दूसरे का गैस-उल-इस्लाम ठोकर बताया गया है. भट पिछले साल अप्रैल में पांच साल तक कैद में रहने के बाद जमानत पर बाहर आया था. उसे डॉक्टर मसूद की हत्या के मामले में 2011 में गिरफ्तार किया गया था. भट के पिता अब्दुल जब्बार ने पुलिस को बताया है कि उनका बेटा काफी समय से लापता था. वह संभवत: पिछले साल 25 सितंबर को हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन में शामिल हुआ है.

पुलिस को संदेह है कि पिछले साल 17 अप्रैल को शोपियां के ही वकील इम्तियाज़ अहमद खान की हत्या में भी भट का हाथ हो सकता है. वे उन तीन वकीलों में थे, जो डॉक्टर मसूद की हत्या के मामले में सरकार की पैरवी कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक, खान की हत्या भी वैसे ही गई थी, जैसे लेफ्टिनेंट फयाज़ को मारा गया. भट और उसके साथियों ने लेफ्टिनेंट फयाज़ को 5.56 एमएम की इंसास राइफल से गोलियां मारीं. यह राइफल पिछले साल पुलिस के शस्त्रागार से लूटी गई थी. तब कुलगाम में दंगा-फसाद के दौरान पुलिस के काफी हथियार आतंकियों ने लूट लिए थे.

गौरतलब है कि सेना की 2-राजपुताना राइफल्स के अधिकारी 22 वर्षीय उमर की दक्षिण कश्मीर के शोपियां में बीते मंगलवार की रात हत्या कर दी गई थी. पिछले साल दिसंबर में ही वे सेना में शामिल हुए थे और पहली बार छुट्‌टी लेकर घर आए थे. कुलगाम जिले के सुरसोना गांव के रहने वाले फयाज़ यहां से करीब 74 किलोमीटर दूर बाटपुरा में मामा की लड़की की शादी में शामिल होने गए थे. तभी रात करीब 10 बजे आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया. अगली सुबह गोलियों से छलनी उनका शव हरमैन इलाके में उनके घर से करीब तीन किलोमीटर दूर मिला. उन्हें बेहद करीब से गोली मारी गई. गोलियां उनके सिर, पेट और सीने में लगी थीं.