विधि आयोग भी मुस्लिमों में प्रचलित तीन तलाक प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक विधि आयोग का मानना है कि तीन तलाक प्रथा की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ शरियत कानूनों की व्याख्या के साथ-साथ धार्मिक आस्था और धार्मिक व्यवहार जैसे मुद्दों की पड़ताल भी कर सकती है. इसे ध्यान में रखकर आयोग ने समान नागरिक संहिता पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने का काम सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने तक धीमा रखने का फैसला किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक विधि आयोग को लगता है कि तीन तलाक प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उसे समान नागरिक संहिता पर रिपोर्ट बनाने में भी मदद कर सकता है. सूत्रों के मुताबिक, ‘एक बार इसकी रूपरेखा सामने आ जाए, उसके बाद सभी पक्षकारों से इस मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी जाएगी.’

समान नागरिक संहिता पर व्यापक चर्चा की जरूरत बताते हुए भाजपानीत केंद्र सरकार ने पिछले साल जून में विधि आयोग से इस पर रिपोर्ट बनाने को कहा था. हालांकि, कई मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने शरियत कानूनों का समर्थन करते हुए सरकार के इस कदम का विरोध किया था. देश में समान नागरिक संहिता लागू करना भाजपा के चुनावी वादों में शामिल है.