बॉलीवुड की फेवरेट मां कही जाने वालीं रीमा लागू ने सालों तक सिनेमा, थिएटर और टेलीविजन के लिए काम किया है. इस दौरान अलग-अलग भूमिकाएं करते हुए वे बतौर अभिनेत्री स्थापित हुईं. हालांकि यह अलग बात है कि अपने सुनहरे करियर के एक दौर में वे दशकों तक फिल्मी सितारों की मां की भूमिकाएं करती रहीं और हिंदी सिनेमा की सबसे प्यारी मांओं में शुमार हो गईं. निरूपा रॉय जहां हमेशा रोने वाली मां रहीं, वहीं रीमा लागू ने फिल्मी मां को मगन और मुस्कुराती हुई छवि दी. हालांकि सिनेमा और टीवी में उनके काम को सिर्फ उनकी मां वाली भूमिकाओं के लिए याद रखना उनके जैसी प्रतिभावान अभिनेत्री के साथ नाइंसाफी होगी.

रीमा का जन्म 1958 में हुआ था. उनकी मां मंदाकिनी भदभदे उस दौर की जानीमानी थियेटर आर्टिस्ट थीं. वहीं रीमा ने भी स्कूल में ही स्टेज पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया था. बारह साल की उम्र में उन्होंने थिएटर करने के साथ-साथ मराठी और हिंदी की कला फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया. 1979 में उन्होंने जब्बार पटेल की फिल्म ‘सिंहासन’ में एक राजनेता की महत्वाकांक्षी बहू की भूमिका निभाई और खूब चर्चा बटोरी.

साल 1980 में गोविंद निहलानी की ‘आक्रोश’ और श्याम बेनेगल की ‘कलियुग’ जैसी फिल्में उनके हिस्से में आईं. आक्रोश में वे एक नौटंकी वाली की भूमिका में नजर आई थीं और लोगों ने उन्हें नजर टिकाकर देखा. रीमा लागू हमारी टीवी के इतिहास का भी हिस्सा रही हैं. उन्होंने पहले टीवी धारावाहिक ‘खानदान’ में काम किया था. इस दौरान वे मराठी थिएटर में लगातार प्रयोग कर रहीं थीं और साक्षात्कारों में जब-तब इनका जिक्र भी करती रहती थीं. साल 1988 आते-आते रीमा लागू सिनेमा-टीवी-थिएटर सब आजमा चुकी थीं और हर जगह उन्हें दर्शकों का उतना ही प्यार मिला. इसी साल उन्होंने ‘रिहाई’ और ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्मों में मां की दो एकदम अलग तरह की भूमिकाएं कीं. ‘कयामत से कयामत तक’ में वे बंदिशें मानने वाली पारंपरिक मां के रूप में नजर आईं, जो लोकप्रिय तो हुआ ही, उसे अच्छी-खासी सराहना भी मिली. लेकिन ‘रिहाई’ में उनके जैसी मां दिखाने पर खासा विवाद खड़ा हो गया. यहां वे एक ऐसी महिला की भूमिका में थीं जिसका पति उसके पास नहीं रहता और इस वजह से उसे किसी दूसरे पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने में कोई हिचक नहीं है.

अब तक रीमा लागू ने मां की भूमिकाएं करनी तो शुरू कर दी थीं, लेकिन बॉलीवुड की फेवरेट मां होने का तमगा देने वाली फिल्म आना अभी बाकी थी. और यह फिल्म थी, सूरज बड़जात्या की 1989 में रिलीज हुई ‘मैंने प्यार किया.’ इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में रीमा लागू सलमान खान की मां बनकर नजर आई थीं. ऐसी ही भूमिका में वे 1994 की सुपरहिट ‘हम आपके हैं कौन’ में भी दोहराई गईं, हालांकि इस बार वे माधुरी दीक्षित की मां बनीं थीं, यानी सलमान की सास. सलमान खान के साथ करीब दर्जनभर फिल्मों में लागू उनकी मां या सास बनकर नजर आई थीं. इनमें से ज्यादातर फिल्में हिट रहीं और लागू पर स्टार की मां होने का ठप्पा लग गया.

इसके बाद रामगोपाल वर्मा की ‘रंगीला’ में वे फिल्म स्टार बनने की चाह रखने वाली बैक-अप डांसर मिली (उर्मिला मातोंडकर) की मां बनीं. साल 1994 तक वे श्रीदेवी, अक्षय कुमार, जूही चावला, सहित काजोल जैसे सितारों की मां की भूमिका निभा चुकी थीं. इस दौर में उन्होंने कई धारावाहिकों में भी काम किया. इनमें से दो कॉमेडी धारावाहिक ‘श्रीमान-श्रीमती’ और ‘तू-तू मैं-मैं’ तो खासे लोकप्रिय भी हुए. इनमें उनका कमाल का कॉमिक सेंस नजर आता है. साल 1999 में उन्होंने मराठी सस्पेंस फिल्म ‘बिंधास्त’ में भी काम किया जो खूब सराहा गया. हालांकि ये सारे काम उनकी ‘मां’ वाली लोकप्रिय छवि से आगे नहीं पहुंच पाए.

स्क्रीन पर, मां बनकर वे जितना प्यार करने वाली होती थीं, कई बार उतनी ही कठोर भी नजर आती थीं. ‘कैद में है बुलबुल’ में वे हीरोइन की जिद्दी मां के रूप में नजर आई थीं जो अपनी बेटी के शादी करने के खिलाफ थी. 1999 में आई महेश मांजरेकर की फिल्म ‘वास्तव’ में उन्होंने मां का कठोरतम रूप दिखाया. इस फिल्म में वे संजय दत्त की मां की भूमिका में थीं, जो आखिर में अपने अपराधी बेटे को गोली मार देती है. इस फिल्म में उनकी जोड़ी शिवाजी साटम के साथ बनी. आगे यह जोड़ी मांजरेकर की ‘जिस देश में गंगा रहता है’ और ‘तेरा मेरा साथ रहे’ में भी दोहराई गई.

रीमा लागू ने न सिर्फ फिल्मी नायकों बल्कि इतिहास के नायकों की मां की भूमिका भी निभाई है. मराठी फिल्म ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय’ में वे शिवाजी की मां जीजाबाई की भूमिका में दिखाई दी थीं. हिंदी फिल्मों के साथ समय-समय पर लागू मराठी फिल्मों में भी नजर आती रहीं. 2006 में उन्होंने गजेंद्र अहिरे की फिल्म ‘सेल’ में काम किया था. इस फिल्म में उन्होंने महाराष्ट्र की गृहमंत्री का रोल निभाया था जो सालों बाद अपने बिछड़े हुए पति से मिलती है. यह फिल्म कुछ कलात्मक और देखी जाने वाली मराठी फिल्मों में से एक है. इसे लागू के अभिनय के लिए भी याद रखा जाना चाहिए. रीमा लागू बेशक बॉलीवुड की सबसे चर्चित और पहचानी हुई मां रही हैं, लेकिन बतौर अभिनेत्री उन्होंने अलग और कई यादगार भूमिकाएं भी निभाईं, जिनकी ज्यादा चर्चा न तो उनके रहते हुई और न ही उनके जाने के बाद हो रही है.