नीदरलैंड स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा सुनाई फांसी की सजा पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी है. गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने पाकिस्तान सरकार से कहा कि जब तक इस कोर्ट में मामला चल रहा है, तब तक जाधव की फांसी की सजा पर अमल नहीं होना चाहिए.

इससे पहले आईसीजे ने पाकिस्तान द्वारा उठाए गए क्षेत्राधिकार के सवाल को खारिज कर दिया. अदालत ने यह भी कहा कि आतंकवाद और जासूसी के तहत दोषी पाए गए लोग विएना संधि के दायरे से बाहर नहीं होते. दरअसल पाकिस्तान ने यहां दलील दी थी कि भारत को कुलभूषण जाधव के मामले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में चुनौती देने का अधिकार नहीं है, क्योंकि विएना संधि की शर्तें जासूसी और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों पर लागू नहीं होतीं. आईसीजे ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान को भारतीय राजनयिकों को कुलभूषण जाधव से मिलने की इजाजत देनी चाहिए.

इससे पहले सोमवार को 11 सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने भारत और पाकिस्तान की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने बीते साल बलूचिस्‍तान से गिरफ्तार करने का दावा किया था. इसके बाद पिछले महीने पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दोषी मानते हुए मौत की सजा सुना दी थी. हालांकि, भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अपहृत करके पाकिस्तान लाया गया था.