विवादित दक्षिण चीन सागर में भारत और सिंगापुर के नौसैनिक अभ्यास पर चीन ने काफी सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. डेक्कन हेरल्ड के मुताबिक शुक्रवार को चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चानयिंग ने कहा, ‘अगर यह सहयोग और साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए है तो हमें कोई दिक्कत नहीं है.’ उन्होंने यह भी कहा कि चीन ऐसी साझेदारियों को लेकर खुली सोच रखता है.

सिंगापुर-भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिमबेक्स) गुरुवार को शुरू हुआ है जो अगले सात दिन चलेगा. दोनों देश 1984 से हर साल नौसैनिक अभ्यास करते आ रहे हैं. इस बार इसमें भारतीय नौसेना के चार जंगी जहाज और पनडुब्बी विध्वंसक विमान पी-8एल हिस्सा ले रहे हैं. हुआ चानयिंग के मुताबिक ऐसी किसी साझेदारी में चीन को बस यह उम्मीद होती है कि वे इसका ध्यान रखेंगे कि इससे अन्य देशों के हितों को कोई चोट न पहुंचे, न ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में खलल पड़े. हालांकि, चीन इससे पहले दक्षिण चीन सागर में तेल खनन में भारत-वियतनाम की साझेदारी का विरोध कर चुका है.

प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न दक्षिण चीन सागर पर चीन अपना एकाधिकार जताता है जिसे लेकर उसका अन्य पड़ोसी देशों से विवाद चल रहा है. चीन ने बीते साल जुलाई में हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय पंचाट से फिलीपींस के पक्ष में आए फैसले को भी मानने इनकार कर दिया था. इसके अलावा उसने यहां से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के गुजरने पर भी ऐतराज जताया था. हालांकि, यहां से गुजरने वाले खबरों डॉलर के समुद्री व्यापार को देखते हुए भारत और अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने इस इलाके में समुद्री परिवहन की आजादी का समर्थन किया है.