वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली शुरू होने के बाद विभिन्न सेवाओं पर एकसमान दर से कर वसूलने की व्यवस्था बीते जमाने की बात हो जाएगी. जीएसटी परिषद की श्रीनगर में चल रही दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन विभिन्न सेवाओं के लिए कर की अलग-अलग दरों को मंजूरी दे दी गई. अब वस्तुओं की तरह सेवाओं के लिए भी पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत की कर की चार श्रेणियां बनाई गई हैं. अभी तक सभी सेवाओं पर 15 फीसदी की दर से कर लगता है.

जीएसटी परिषद की बैठक खत्म होने के बाद शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया, ‘आज की बैठक में सेवा क्षेत्र से संबंधित जीएसटी की दरों को तय कर लिया गया. सेवाओं की प्रकृति को देखते हुए कर की ​विभिन्न श्रेणियां तय की गई हैं.’ जेटली ने दावा किया कि जीएसटी लागू होने के बाद सेवाओं की अंतिम लागत में कोई वृद्धि नहीं होगी. उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर कोई कर न वसूलने की मौजूदा व्यवस्था बरकरार रखने का फैसला लिया है. सरकार ने बाकी रह गई छह वस्तुओं पर कर दरों के निर्धारण और अन्य बाकी मसलों के लिए दिल्ली में तीन जून को जीएसटी परिषद की एक और बैठक बुलाने का फैसला लिया है. ये छह वस्तुएं बायोडीजल, सिगरेट और बीड़ी, फुटवियर, कपड़े, बिजली से चलने वाले कृषि उपकरण और सोना हैं.

अब तक प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, रेलवे और वायु परिवहन को पांच फीसदी की कर श्रेणी में रखा गया है. ऐसा इसलिए कि पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के दायरे से बाहर रखे गए हैं. एक हजार रुपये से कम टैरिफ वाले होटलों को भी जीएसटी से छूट मिलेगी. नॉन-एसी होटल में 12 फीसदी का सेवा कर ​देना होगा. दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं सहित ढाई हजार से पांच हजार रु तक टैरिफ वाले होटलों में 18 फीसदी की जीएसटी दर लागू होगी. वहीं रेस क्लब, सिनेमा हॉल और पांच हजार रु से ज्यादा टैरिफ लेने वाले लक्जरी होटलों की सेवाओं पर 28 फीसदी का कर वसूला जाएगा.

जानकारों के ​अनुसार जीएसटी परिषद से मंजूरी के ​पहले अधिकारियों के एक पैनल ने छह हफ्तों की कड़ी मशक्कत के बाद वस्तुओं और सेवाओं पर कर की श्रेणियां तय की. इस पैनल ने जीएसटी दरों का राजस्व और महंगाई पर नकारात्मक असर न पड़ने देने का लक्ष्य रखते हुए वर्गीकरण किया है. सरकार की पूरी कोशिश है कि जीएसटी को इस साल पहली जुलाई से लागू कर दिया जाए. टैक्स की दरें तय होने के बाद जीएसटी लागू होने की दिशा में आखिरी काम इस कानून को अलग-अलग राज्यों से मंजूरी दिलवाना होगा. इसके बाद ही केंद्र इस कानून के संबंध में अधिसूचना जारी कर सकेगा.