सुप्रीम कोर्ट ने कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने संबंधी केंद्र की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. डेक्कन हेरल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने कहा, ‘दोहराव से बचने के लिए बेहतर होगा कि इससे जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाए.’ इस पर अब 27 जून को सुनवाई होगी. शीर्ष अदालत का यह निर्देश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष शांता सिन्हा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आया.

हालांकि इस पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सख्त ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच ही सुनवाई कर सकती है, क्योंकि इससे पहले अक्टूबर 2015 में संवैधानिक बेंच ने फैसला सुनाया था. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं से आधार नंबर जोड़ने की 30 जून की अंतिम समय सीमा नहीं बढ़ाएगी. मुकुल रोहतगी के मुताबिक इसका मकसद योजनाओं में भ्रष्टाचार और अपात्र लोगों को लाभ उठाने से रोकना है.

अटॉर्नी जनरल ने आधार के खिलाफ याचिका लगाने वालों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘जिन्हें इन योजनाओं से लाभ मिलना है, वे अदालत का चक्कर नहीं लगा रहे हैं, बल्कि जिनका कोई लेना-देना नहीं है वे लोग बार-बार याचिकाएं लगाए जा रहे हैं. ये सभी एक ही गुट के लोग हैं.’ मेजर जनरल (रिटायर) एसजी वोम्बटकेरे की अक्टूबर 2016 की याचिका का उल्लेख करते हुए मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि इसमें और शांता सिन्हा की जनहित याचिका में काफी समानता है. हालांकि, शांता सिन्हा के वकील श्याम दीवान ने इस आरोप को खारिज किया.