चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना द बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को लेकर बीते दिनों बीजिंग में आयोजित सम्मेलन में भारत ने हिस्सा नहीं लिया. चीन पाकिस्तान औद्योगिक गलियारा (सीपेक) भी इस परियोजना का हिस्सा है जिसका भारत संप्रभुता के आधार पर विरोध कर रहा है. यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है. भारत ने इस पर आपत्ति जताते हुए चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया है.
लेकिन अब चीन पाकिस्तान औद्योगिक गलियारे को पाकिस्तान की संप्रभुता के लिए भी खतरा बताया जा रहा है. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डाॅन ने इस औद्योगिक गलियारे से संबंधित प्रमुख दस्तावेजों के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसके मुताबिक इस गलियारे के लिए जिस दस्तावेज पर पाकिस्तान ने दस्तखत किए हैं, उसमें कई ऐसी बातें हैं जो किसी भी संप्रभु देश के लिए आपत्तिजनक होनी चाहिए.
चीन में आयोजित सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस दस्तावेज पर दस्तखत किए. इसके बाद उनका जो बयान आया उसका मतलब यह निकलता है कि यह औद्योगिक गलियारा पाकिस्तान के लिए आर्थिक और रणनीतिक तौर पर किसी वरदान से कम नहीं है. पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस औद्योगिक गलियारे के जरिए उसके यहां तकरीबन 50 अरब डॉलर का निवेश होगा. यह गलियारा चीन को ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाला है.
इसी दस्तावेज में यह भी लिखा है कि चीन पाकिस्तान से चीनी नागरिकों और कारोबारियों के पाकिस्तान आने-जाने के लिए वीजा की बाध्यता को समाप्त करने की उम्मीद कर रहा है
लेकिन इसी दस्तावेज में यह भी लिखा है कि चीन पाकिस्तान से चीनी नागरिकों और कारोबारियों के पाकिस्तान आने-जाने के लिए वीजा की बाध्यता को समाप्त करने की उम्मीद कर रहा है. इस आधार पर यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि कहीं चीन पाकिस्तान की स्थिति भी तिब्बत की तरह बनाने की योजना पर तो नहीं काम कर रहा. इस अंदेशे को बल इस तथ्य से भी मिल रहा है कि चीन में रह रहे मुस्लिम स3मुदाय की स्थिति अच्छी नहीं है. उसे कई तरह के सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में पाकिस्तान जैसे मुस्लिम राष्ट्र पर चीन के इतने बड़े दांव को लेकर कई स्तर पर संदेह जताया जा रहा है. कई जानकारों का मानना है कि इससे पाकिस्तान चीन का आर्थिक उपनिवेश बन जाएगा.
इस दस्तावेज में दूसरी आपत्तिजनक बात यह बताई जा रही है कि पूरे औद्योगिक गलियारे पर 24 घंटे वीडियो कैमरों के जरिए निगरानी होगी, लेकिन इस निगरानी के लिए जो आॅफिस बनाया जाएगा वह कहां होगा, यह स्पष्ट नहीं है. डाॅन के मुताबिक संभव है कि चीन पाकिस्तान की सीमा में बनने वाले औद्योगिक गलियारे के इन वीडियो फीड की निगरानी अपनी जमीन से करे. अगर ऐसा होता है तो जाहिर सी बात है कि यह पाकिस्तान की संप्रभुता के विरुद्ध होगा क्योंकि इससे चीन को पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की पल-पल की जानकारी मिलती रहेगी.
कहने को तो यह औद्योगिक गलियारा है लेकिन इसके मूल दस्तावेज में चीन कई ऐसी शर्तें पाकिस्तान के सामने रख रहा है जिनसे पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र में चीन का काफी दखल बढ़ जाएगा. बीज से लेकर फसलों के प्रसंस्करण तक में चीन की भूमिका बढ़ने के स्पष्ट संकेत इस दस्तावेज से मिलते हैं. साथ ही चीनी संस्कृति को पाकिस्तान में बढ़ावा देने वाले कदमों की चर्चा भी इस दस्तावेज में की गई है. इन सभी बिंदुओं को देखते हुए पाकिस्तान में एक वर्ग इस औद्योगिक गलियारे को लेकर सवाल उठाने लगा है. पहले से ही पाकिस्तान के कुछ हिस्से में इस औद्योगिक गलियारे के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है. जिनकी जमीन इसके लिए जानी है उनमें से एक वर्ग इसका विरोध कर रहा है.
कहने को तो यह औद्योगिक गलियारा है लेकिन इसके मूल दस्तावेज में चीन कई ऐसी शर्तें पाकिस्तान के सामने रख रहा है जिनसे पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र में चीन का काफी दखल बढ़ जाएगा
इस औद्योगिक गलियारे के लिए जिस समझौता पत्र का जिक्र डॉन अखबार ने अपनी रिपोर्ट में किया है, वह 231 पन्नों का है. पाकिस्तान सरकार को इस समझौते पर दस्तखत करने के लिए कुछ राज्यों की सहमति अनिवार्य थी. लेकिन उसे लग रहा था कि अगर मूल दस्तावेज सभी राज्यों के पास भेजा तो वे इसका विरोध कर सकते हैं. इसलिए पाकिस्तान सरकार ने 231 पन्नों के मूल दस्तावेज के बदले 31 पन्नों का एक संक्षिप्त दस्तावेज राज्यों के पास भेजा. राज्यों को भेजे दस्तावेज से आपत्तिजनक मसले गायब हैं. इसी संक्षिप्त दस्तावेज के आधार पर राज्यों ने इस औद्योगिक गलियारे के लिए सहमति दे दी. इसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने समझौते पर दस्तखत किए.
भले ही चीन और पाकिस्तान के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता हो गया हो लेकिन कहा जा रहा है कि डाॅन द्वारा इस खबर के प्रकाशन से पाकिस्तान में इस औद्योगिक गलियारे का विरोध तेज हो सकता है. इसके संकेत भी मिलने लगे हैं. सरकार के स्तर पर डॉन के इस खुलासे के बाद कहा गया है कि जिस दस्तावेज का जिक्र इस रिपोर्ट में किया गया है, वह मूल दस्तावेज नहीं है बल्कि समझौते के लिए तैयार कई मसौदों में एक है.
लेकिन विपक्षी दल सरकार की यह बात मानने को तैयार नहीं हैं. विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह समझौते से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करे. वहीं इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ ने भी चीन के साथ ऐसा समझौता करने के लिए सरकार को आड़े हाथों लिया है.
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