बॉलीवुड में रोमांस की परिभाषा यशराज फिल्म्स (वाईआरएफ) तय करता रहा है. यश चोपड़ा किंग ऑफ रोमांस कहे जाते थे. बेटे आदित्य चोपड़ा भी पिता के पदचिन्हों पर चल रहे हैं. चांदनी (1989), लम्हे (1991) और डर (1993) में अपने पिता का हाथ बंटाने के बाद उन्होंने 1995 में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (डीडीएलजे) के साथ स्वतंत्र रूप से निर्देशन की शुरुआत की और अपनी इस पहली फिल्म से ही एक बड़ी नजीर बना दी.

आदित्य चोपड़ा ने जब यह फिल्म निर्देशित की तो वे मात्र 23 साल के थे. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले भी उन्होंने ही लिखा था. डीडीएलजे को कई लिहाज से मील का पत्थर कहा जाता है. शाहरुख-काजोल की जोड़ी की लोकप्रियता को डीडीएलजे ने एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. इस फिल्म ने भारत से बाहर भी बढ़िया कारोबार किया और एनआरआई दर्शकों का एक नया वर्ग शुरू किया. फिल्म के कई संवाद आम बोलचाल का हिस्सा बन गए. मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमाघर में यह फिल्म लगातार 20 साल तक लगी रही.

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डीडीएलजे ने रिकॉर्ड 10 फिल्मफेयर पुरस्कार अपनी झोली में डाले थे. सरसों के खेत से लेकर बैकग्राउंड म्यूजिक तक डीडीएलजे ने बॉलीवुड को प्यार के कई टोटके दिए. इस फिल्म के साथ ही आदित्य चोपड़ा ने रोमांस को नए तरीके से दिखाने का चलन शुरू किया जो आज भी उनकी बड़ी खासियत मानी जाती है. आदित्य चोपड़ा ने कुल चार फिल्मों का ही निर्देशन किया है. इनमें से तीन के नायक शाहरुख खान रहे हैं. निर्देशक के रूप में उनकी आखिरी फिल्म थी 2016 में आई बेफिकरे.

बॉलीवुड में फिल्मों का स्टूडियो मॉडल आदित्य चोपड़ा ने ही शुरू किया था. उनकी अगुवाई में वाईआरएफ भारत में फिल्म निर्माण और वितरण से जुड़ी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है. हाल के समय में इस बैनर ने कई बड़ी हिट फिल्में दी हैं जिनमें सुल्तान, पीकू, फैन, टाइगर जिंदा है और सुई-धागा जैसे नाम शामिल हैं.

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