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करण जौहर के पिता यश जौहर बतौर निर्माता बहुत सफल नहीं रहे थे. उनकी पहली फिल्म ‘दोस्ताना’ के अलावा ज्यादातर फिल्मों में उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था. इसलिए वे नहीं चाहते थे कि करण किसी भी तरह फिल्मों से जुड़ें लेकिन आदित्य चोपड़ा ने उन्हें डीडीएलजे में असिस्टेंट डायरेक्टर बना दिया. इसी दौरान शाहरुख ने करण से एक फिल्म लिखने के लिए कहा. अपनी किताब ‘एन अनसूटेबल बॉय’ में करण जौहर इस बात का जिक्र करते हुए लिखते हैं कि शाहरुख ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर वे फिल्म बनाएंगे तो शाहरुख उसमें काम करेंगे. बाद में शाहरुख ने अपने साथ शूटिंग कर रही काजोल को भी ‘कुछ-कुछ होता है’ में काम करने के लिए राजी कर लिया.

शाहरुख ने करण को दो साल बाद की डेट्स दे दीं और तब तक फिल्म लिखने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने डेढ़ साल ऐसे ही निकाल दिए. एक दिन जब शाहरुख ने उन्हें फिल्म की कहानी सुनाने के लिए बुलाया तो मीटिंग से ठीक पहले, करण जौहर ने कुछ कुछ होता है का आइडिया सोचा. करण किसी ऐसी भूमिका के बारे में सोच रहे थे जो शाहरुख ने कभी न निभाई हो. और उन्होंने पाया कि शाहरुख ने इससे पहले कभी पिता नहीं बने थे. इसलिए उन्होंने एक अंग्रेजी फिल्म जैक एंड सारा से प्रेरित होकर एक बाप और बिना मां की बेटी की कहानी बुन ली और शाहरुख को सुना दी. फिल्म बनाने के लिए उनके दिमाग में आर्ची कॉमिक्स की एक लव ट्राएंगल स्टोरी भी थी. बाद में उन्होंने इन दो अलग कहानियों को जोड़कर एक पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर दी. इसे आदित्य चोपड़ा ने ‘कुछ-कुछ होता है’ नाम दिया.

महीनों की मेहनत के बाद स्क्रिप्ट तैयार हुई. लीड रोल तो पहले से तय थे इसलिए अब फिल्म में बाकी स्टार कास्ट की तलाश करनी थी लेकिन यह इतना आसान नहीं था. फिल्म में टीना की भूमिका करने से लगभग सभी टॉप हीरोइनों ने मना कर दिया था. हर अभिनेत्री अंजलि की मुख्य भूमिका करना चाहती थी. आदित्य और शाहरुख की सलाह पर रानी मुखर्जी के पास पहुंचे. करण चाहते थे कि रानी यह फिल्म न करें क्योंकि उनका मानना था कि छोटी और मोटी रानी को हॉट गर्ल दिखाना एक बड़ी चुनौती थी. उधर प्रेम के छोटे से रोल के लिए भी सैफ अली खान से लेकर चंद्रचूड़ सिंह तक ने मना कर दिया था. हालांकि बाद में सलमान खान ने खुद आकर करण जौहर से यह रोल करने के लिए कहा और उनकी मुश्किल आसान कर दी. उन्होंने करण को नैरेशन के लिए बुलाया और बाद में बिना पूरी स्क्रिप्ट सुने ही फिल्म के लिए हां कर दी.

फिल्म बनकर रिलीज के लिए तैयार हो गई और इसके लिए तारीख तय हुई 16 अक्टूबर 1998. यानी बीती 16 अक्टूबर को इस फिल्म की रिलीज को बीस साल पूरे हो गए. बीस सालों का यह वक्त गुजरने की तुलना में फिल्म की रिलीज उतनी आसान नहीं रही थी. कारण यह कि रिलीज के ठीक पहले करण जौहर की मां को अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने फोन पर करण को जान से मारने की धमकी दी. वो फिल्म रिलीज की तारीख आगे बढ़वाना चाहता था. इस धमकी की वजह से फिल्म तो नहींं टली लेकिन करण फिल्म के प्रीमियर तक में शामिल नहीं हो सके. उन्हें लंदन में छिपना पड़ा. इसके चलते न वे अपनी फिल्म के लिए थिएटर के बाहर लगती लाइन देख सके न ही उन्होंने फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनते देखा. कुल मिलाकर, करण जौहर जब फिल्म नहीं बनाना चाहते थे तो किसी ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया और जब उनकी फिल्म बनकर तैयार हो गई तो किसी ने उसे रिलीज करने से भी रोका. शायद, नायक और खलनायक में यही फर्क होता है जो हमारी फिल्में भी हमें दिखाती हैं और जिंदगी भी.