केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की लखनऊ स्थित विशेष अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती को समन जारी किया है. इन नेताओं को 30 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है. इससे पहले इन नेताओं ने अदालत में व्यक्तिगत हाजिरी से छूट देने की अर्जी लगाई थी, जिसे अदालत ने नहीं माना.

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोपों को बहाल कर दिया था. इससे पहले रायबरेली की विशेष अदालत ने इन सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप खारिज कर दिया था. इस फैसले को 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया था.

हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस फैसले को पलटते हुए लखनऊ और रायबरेली की अदालतों में अलग-अलग चल रहे बाबरी विध्वंस से जुड़े मुकदमों को आपस में जोड़ने और उनकी लखनऊ में एक साथ सुनवाई करने का आदेश दिया था. अदालत ने यह भी कहा था कि यह सुनवाई चार हफ्ते में शुरू की जाए और रोजाना सुनवाई कर इसे दो साल में पूरा किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, इन मामलों की सुनवाई करने वाले जजों का तबादला न किया जाए.

अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा (बाबरी मस्जिद) गिराने के मामले में सीबीआई ने दो एफआईआर दर्ज की थीं. पहली एफआईआर ढांचा गिराने वाले अज्ञात कारसेवकों के ख़िलाफ थी, जबकि दूसरी में अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर (विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता), आडवाणी, जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार, साध्वी ऋतम्भरा, विष्णु हरि डालमिया, बाल ठाकरे (दिवंगत शिवसेना प्रमुख) आदि नाम शामिल थे. इन सभी लोगों पर भीड़ को उकसाने वाला भाषण देने और समुदायों के बीच द्वैष फैलाने जैसे आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ था. हालांकि, बाद में इसमें आपराधिक साजिश का आरोप भी जोड़ दिया गया था.