इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी टेस्ला के लिए अब भारत की राह आसान होती नजर आ रही है. केंद्र सरकार ने टेस्ला को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने के लिए 30 फीसदी लोकल सोर्सिंग यानि स्थानीय स्रोतों से कच्चा माल लेने के प्रावधान से छूट दे दी है. वाणिज्य और औद्योगिक मंत्रालय ने टेस्ला के सीईओ एलेन मस्क को इस मंगलवार ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी है.

इससे पहले खबरें आईं थी कि टेस्ला भारत में लोकल सोर्सिंग की अनिवार्यता के चलते यहां मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने से झिझक रही थी. इस बारे में एलन मस्क ने ट्विटर पर कहा था, ‘हो सकता है मुझे गलत जानकारी मिली थी कि भारत में 30 फीसदी लोकल सोर्सिंग जरूरी है और भारत में फिलहाल इतनी आपूर्ति मुमकिन नहीं.

जानकार सरकार के इस कदम को उस मुहिम का हिस्सा बता रहे हैं जिसके तहत भारत में पेट्रोल-डीज़ल कारों की बिक्री रोकने की बातें की जा रही हैं. दरअसल पिछले महीने कोयला एवं खनन मंत्री पीयूष गोयल ने एक बयान जारी कर कहा था कि 2030 तक देश के बाजार में पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाली एक भी कार नहीं बिकनी चाहिए. हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो भारत जैसे देश में जहां अभी तक हजारों गांवों तक बिजली नहीं पहुंची है वहां इस तरह की उम्मीदें दूर की कौड़ी हैं. उनके मुताबिक खनन मंत्री का यह बयान नार्वे, नीदरलैंड और जर्मनी की महज नकल मात्र हैं जो बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के क्षेत्र में भारत से कहीं आगे हैं.

अगले 13 सालों में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर होने के सरकारी बयान पर ऑटोमोबाइल सेक्टर के अनुभवी लोगों ने वे तमाम सवाल उठाए हैं जिनके जवाब अभी सरकार को ढूंढने बाकी हैं. इन सवालों में प्रमुख हैं- देश में मौजूद करीब 60,000 पेट्रोल पंपों का क्या होगा? इतनी बिजली का उत्पादन कैसे किया जाएगा? मौजूदा वाहनों में पूरी क्षमता का पेट्रोल या डीज़ल भरने में महज पांच से 15 मिनट लगते हैं तब भी दिन में कई बार पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग जाती हैं. जबकि एक इलेक्ट्रिक कार को पूरा चार्ज होने में करीब एक घंटे का समय लगता है. ऐसे में भारत जैसा देश जहां बड़ी संख्या में गाड़ियां मौजूद हैं, उन्हें यदि इतनी देर में चार्ज किया गया तो इलेक्ट्रिसिटी सेंटरों पर किलोमीटरों तक लगी लंबी लाइनों को कैसे नियंत्रित किया जाएगा?

फॉक्सवैगन ने एसयूवी टिगुआन को लॉन्च किया

लंबे समय से फॉक्सवैगन की एसयूवी चलाने की चाह पाले लोगों का इंतजार अब खत्म हो गया है. इस बुधवार जर्मन कार कंपनी ने अपनी प्रीमियम एसयूवी टिगुआन को भारत में लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस पांच सीटर कार को मॉड्यूलर ट्रांसवर्स मैट्रिक्स (एमक्यूबी) प्लेटफॉर्म पर तैयार किया है. टिगुआन से पहले फॉक्सवैगन ग्रुप की स्कोडा ऑक्टेविया, सुपर्ब और ऑडी ए-3 को इसी प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया था. करीब एक दशक पहले टिगुआन को यूरोप के बाजार में उतारा गया था जहां इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली. भारत में टिगुआन को कंपनी के महाराष्ट्र स्थित प्लांट में तैयार किया जाएगा.

टिगुआन की लॉन्चिंग पर फॉक्सवैगन ग्रुप सेल्स इंडिया के प्रबंध निदेशक थिएरी लेस्पिएक ने अपने बयान में कहा, ‘टिगुआन ने दुनियाभर में एक ठोस और क्षमतावान कार के रूप में अपनी पहचान बनायी है. हमें वैश्विक बाजार में अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली कार को भारत में उतार कर बेहद खुशी है.’ अपने बयान में थिएरी ने आगे कहा, ‘यह एसयूवी सुरक्षा, स्टाइल शान और प्रदर्शन का बेजोड़ नमूना है.’

फॉक्सवैगन-टिगुआन
फॉक्सवैगन-टिगुआन

फॉक्सवैगन ने टिगुआन के दो वेरिएंट- कंफर्टलाइन और हाइलाइन बाजार में उतारे हैं. इस कार में उपलब्ध एलईडी हैडलैंप्स के साथ डे-टाइम रनिंग एलईडी लाइट, एलईडी टेललैंप्स, थ्री-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रिक एडजस्टेबल फ्रंट सीट और छह एयरबैग इसे खास बनाते हैं. गाड़ी के दम के बारे में बताने के लिए इसके साथ जुड़ा फॉक्सवैगन का नाम काफी है. कंपनी ने इस कार में 2.0 लीटर का टीडीआई डीज़ल इंजन दिया है जो 143 पीएस की अधिकतम पॉवर के साथ 320 एनएम का अधिकतम टॉर्क पैदा करता है. यह इंजन 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से जुड़ा है.

गाड़ी के डायमेंशन्स की बात की जाए तो इसकी लंबाई-4,486 एमएम, चौड़ाई-1,839 एमएम और ऊंचाई- 1,672 एमएम है. इसके साथ 2,677 एमएम का व्हील बेस इसे हेवी लुक देता है. कंपनी ने इसकी कीमत 27.68 लाख रुपए (एक्स शोरूम मुंबई) से 31.04 लाख रुपए (एक्स शोरूम मुंबई) तय की है. बताया जा रहा है कि टिगुआन टोयोटा फॉर्च्यूनर, फोर्ड एंडेवर, मिश्तुबुशी पजेरो और हाल ही में लॉन्च हुई आईसुजु एमयू-एक्स को कड़ी टक्कर दे सकती है. हालांकि भारत जैसे देश में जहां एसयूवी को लुक्स और ताकत से ज्यादा सीटों की संख्या से जोड़कर देखा जाता है वहां फॉक्सवैगन की यह नई पांच सीटर कार कितने ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित कर पाएगी, कहना मुश्किल है. जानकारों के मुताबिक कंपनी ने इसकी कीमत भी थोड़ी ज्यादा रखी है.

मर्सिडीज और ऑडी ने अपनी कारों की कीमतें घटाईं

लग्जरी कारों के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है. जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज बेंज ने भारत में निर्मित होने वाली कारों की कीमतें कम करने की घोषणा की है. उसका कहना है कि एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद कारों पर लगने वाले टैक्स में जो कटौती होगी उसका फायदा वह अभी से अपने ग्राहकों को देना चाहती है. जिसके चलते कंपनी की कारों में सात लाख तक की कमी देखने को मिल सकती है. मर्सिडीज के मुताबिक नई कीमतें इसी शुक्रवार से प्रभावी हो चुकी हैं.

हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जीएसटी के लागू होने में कोई देरी होती है तो वह अपने वाहनों की कीमतों को फिर से बढ़ा देगी. भारत के बाजार में फिलहाल मर्सिडीज़ के नौ मॉडल उपलब्ध हैं. जिनमें सीएलए सेडान, एसयूवी जीएलए, जीएलसी, जीएलई और जीएलस, लग्जरी सेडान सी-क्लास, ई-क्लास, एस-क्लास और मेबैक एस-500 जैसी कारें शामिल हैं. जिनकी कीमतें 32 लाख रुपए से लेकर 1.32 करोड़ रुपए (एक्स शोरूम) तक है.

मर्सिडीज़ और ऑडी
मर्सिडीज़ और ऑडी

जर्मनी की ही लग्जरी कार निर्माता और मर्सिडीज की प्रतिद्वंदी कंपनी ऑडी ने भी अपनी कारों की कीमतों की कटौती की घोषणा कर दी है. बताया जा रहा है कि ऑडी की कारों में 10 लाख रुपए तक की कमी देखने को मिल सकती है. भारत में ऑडी की ए-3 सेडान से लेकर ए-8 तक कि प्रीमियम सेडान उपलब्ध हैं. जिनकी कीमतें 30 लाख रुपए से लेकर 1.15 करोड़ रुपए (एक्स शोरूम) के बीच हैं. कंपनी का कहना है कि कारों पर मिल रही यह छूट उसके पुराने मॉडलों के साथ नयी कारों पर भी उपलब्ध है.

इन दोनों कंपनियों की तर्ज पर जर्मनी की ही एक और लग्जरी कार कंपनी बीएमडब्ल्यू ने भी अपनी कारों की कीमतों में 12 फीसदी तक का लाभ देने की बात कही है. इनमें घटी हुई ब्याज दर, तीन साल तक मुफ्त सर्विस व रखरखाव और एक साल का मुफ्त बीमा शामिल है.