गोमांस और गोहत्या का मसला एक बार फिर ज़ोर पकड़ रहा है. केंद्र सरकार ने हाल में ही क़त्ल किए जाने के मक़सद से गोवंश की खरीद-फरोख़्त पर रोक लगाई है. इसका पश्चिम बंगाल, केरल, पुड्‌डुचेरी जैसे कई राज्यों में खुला विराेध हो रहा है. हालांकि इस विरोध की अगुवाई कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस जैसे गैर-भाजपाई दल ही कर रहे हैं. लेकिन अब सामने आया है कि ख़ुद भाजपा में इस मसले पर एकराय नहीं है.

ख़बरों के मुताबिक मेघालय में भाजपा की तुरा जिला इकाई के अध्यक्ष बर्नार्ड मरक ने घोषणा की है, ‘पार्टी अगर राज्य की सत्ता में आई तो वह गोमांस पर प्रतिबंध नहीं लगाएगी. उसके दाम कम करेगी. इस सिलसिले में राज्य के लोगों को केंद्र के नए आदेश से चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है.’ उन्होंने आश्वासन दिया कि पार्टी राज्य में ‘अवैध बूचड़ख़ानों पर प्रतिबंध लगाएगी और गोमांस की कीमतों के साथ ही गुणवत्ता का भी नियमितीकरण करेगी.’

उन्होंने आरोप लगाया कि मौज़ूदा कांग्रेस सरकार की लापरवाही के कारण राज्य में बेचा जा रहा मांस उपभोग के लायक नहीं है क्योंकि पशु चिकित्सक की ओर से उसके प्रमाणीकरण का कोई इंतज़ाम नहीं है. सत्ता में आने पर इन तमाम ख़ामियों को भाजपा दूर करेगी. यही नहीं मरक के अलावा भाजपा की मेघालय राज्य इकाई ने भी प्रदेश प्रभारी नलिन कोहली को पत्र लिखा है. इसमें मांग की है कि गोमांस प्रतिबंध से राज्य को मुक्त रखा जाए.

दरअसल, मेघालय में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में सत्ता पर काबिज़ हो चुकी भाजपा को लगता है कि वह मेघालय में भी सरकार बना सकती है. लेकिन गोमांस का मुद्दा वहां भाजपा के लिए गले की फांस बन सकता है. क्योंकि इन राज्यों की अधिकांश आबादी गोमांस खाती है. यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है. यही वज़ह है कि पार्टी के नेता इस इलाके में गोमांस के मुद्दे पर अलग राय रखते नज़र आ रहे हैं.