क्या भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर उग्र हो रहे राम जन्मभूमि आंदोलनकारियों को बहलाने की कोशिश कर रही है? इस सवाल के पीछे दो ख़बरें हैं. पहली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की योजना से ताल्लुक रखती है जबकि दूसरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से संबंधित है.

द एशियन एज के मुताबिक केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय अयोध्या को बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना अमल में लाने वाला है. इसके तहत यहां आलीशान होटल, विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला रेलवे स्टेशन, स्टेट-ऑफ-आर्ट कैंपस आदि स्थापित और विकसित किए जाएंगे. करीब 225 करोड़ रुपए की लागत से रामायण संग्रहालय स्थापित किए जाने को भी मंजूरी दे दी गई है. अयोध्या को पर्यटन मंत्रालय की बहुप्रचारित ‘रामायण सर्किट’ योजना के केंद्र में भी रखा गया है. मंत्रालय के एक अधिकारी समाचार एजेंसी पीटीआई से कहते हैं, ‘हम चाहते हैं पर्यटक यहां आएं और रुकें. इसीलिए यहां पर्यटक कैंपस स्थापित करने की योजना बनाई है. ऐसे ही कैंपस गया, मथुरा, वाराणसी, सारनाथ, गोरखपुर, आगरा, अमृतसर, कन्याकुमारी और गुवाहाटी में भी स्थापित किए जाएंगे.’

उधर एक अन्य ख़बर के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार के अयाेध्या के दौरे पर जा रहे हैं. मार्च में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद उनकी यह पहली अयोध्या यात्रा है. यहां वे राम लला के दर्शन करेंगे. साधु-संतों से भी मुलाकात करेंगे. साथ ही हनुमान गढ़ी मंदिर सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर भी जाएंगे. इसके अलावा राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्म दिवस समारोह में भी मुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे. याद दिला दें कि योगी आदित्यनाथ राम जन्मभूमि आंदोलन के अगुवा नेता रहे हैं. जबकि राम जन्मभूमि न्यास अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कामकाज़ देख रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद कुमार शर्मा ने आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे की पुष्टि की है.