देश भर के पशु बाजारों में मांस के लिए मवेशियों की बिक्री पर रोक लगाने वाला केंद्र सरकार का फैसला भाजपा की मुश्किलें बढ़ाता दिखाई दे रहा है. मेघालय के एक भाजपा नेता ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 के तहत लाए गए इन नियमों के विरोध करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. एनडीटीवी के मुताबिक पश्चिमी गारो हिल्स के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष बर्नार्ड मारक ने कहा, ‘मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला इसलिए किया कि मैं सबसे पहले ईसाई और गारो हूं. भाजपा बीफ को लेकर यहां के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है. आदिवासी समाज के अपने नियम-कायदे हैं. भाजपा हिंदुत्व को थोपने की कोशिश कर रही है.’

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बर्नार्ड मारक के इस्तीफे के पीछे मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर मेघालय के कुछ भाजपा नेताओं द्वारा बीफ पार्टी आयोजित करने के फैसले से जुड़ा विवाद है. इस बारे में बर्नार्ड मारक का कहना है, ‘अगर हम अपने पारंपरिक तरीके से मोदी सरकार की तीन साल पूरे होने का जश्न मनाना चाहते थे, तो इसमें गलत क्या है?’ बर्नार्ड मारक के मुताबिक बीफ पार्टी का आयोजन लोगों के दिमाग से भाजपा के गोमांस विरोधी होने का डर निकालने के लिए किया जा रहा था. मेघालय में भाजपा के अध्यक्ष शिबुन लिंदोह का भी कहना है कि गोमांस पर पूर्ण प्रतिबंध का राज्य के लोग कभी भी समर्थन नहीं करेंगे.

मेघालय में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इन्हें देखते हुए बर्नार्ड मारक ने वादा किया था कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो सस्ता बीफ उपलब्ध कराया जाएगा. मेघालय ही नहीं, पूर्वोत्तर के मिजोरम और नगालैंड की बहुसंख्यक आबादी भी ईसाई है और गोमांस यहां के सामान्य खान-पान का हिस्सा है. यही वजह है कि इन राज्यों में विस्तार की संभावना तलाश रहे भाजपा नेता लगातार यह सफाई दे रहे हैं कि भाजपा के सत्ता में आने पर गोहत्या या गोमांस पर पाबंदी नहीं लगेगी.