आशंकाओं को सच साबित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस समझौते से हटने का ऐलान कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 2015 में जलवायु परिवर्तन को लेकर हुआ यह वैश्विक समझौता अमेरिका के साथ न्याय नहीं करता. उनका यह भी कहना था कि अब वे इस समझौते की शर्तों को फिर से तय करने के लिए बातचीत करेंगे. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘यह सफल हुई तो बहुत बढ़िया, नहीं तो कोई बात नहीं.’

प्रदूषण फैलाने वाले देेशों की सूची में अमेरिका का स्थान दूसरा है. डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान का मतलब पेरिस समझौते पर बड़ी चोट है जिसके तहत तय हुआ था कि वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को औद्योगीकरण से पहले के समय की तुलना में दो डिग्री से आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा. लेकिन अब अमेरिका के इससे हटने का मतलब है कि इसका हाल भी 1997 में हुए क्योटो समझौते जैसा हो सकता है जिसके नतीजे उम्मीद से बहुत कम रहे हैं. अमेरिका इस समझौते में भी शामिल नहीं हुआ था.

डोनाल्ड ट्रंप ऐसा कर सकते हैं, यह आशंका काफी समय से जताई जा रही थी. वे कई बार पेरिस समझौते की आलोचना कर चुके थे. चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने इससे हटने का वादा किया था. उन्होंने तो जलवायु परिवर्तन की बात को ही शिगूफा करार दिया था. डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि पेरिस समझौते के तहत चीन और भारत जैसे देश तो कोयले का उत्पादन तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन अमेरिका नहीं जो नाइंसाफी है.