सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं. इन देशों ने क़तर पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है. इनका कहना है कि क़तर मुस्लिम ब्रदरहुड, इस्लामिक स्टेट और अलक़ायदा जैसे आतंकी संगठनों की मदद कर रहा है.

सऊदी अरब में सरकार संचालित समाचार एजेंसी एसपीए के मुताबिक कतर के साथ ज़मीनी, हवाई और समुद्री सीमा बंद कर दी गई हैं. एक सऊदी अधिकारी के हवाले से एसपीए ने बताया, ‘चरमपंथ और कट्टरपंथ के ख़तरों से ख़ुद को बचाने के लिए कतर के साथ संबंध ख़त्म करने का निर्णायक फैसला किया गया है.’

संयुक्त अरब अमीरात ने कतर के राजनयिकों को वापस जाने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. यहां की समाचार एजेंसी डबल्यूएएम के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर पर चरमपंथी संगठनों की मदद करने और फंडिग देने का आरोप लगाया है. मिस्र के विदेश मंत्रालय ने भी क़तर के विमानों और पोतों के लिए हवाई क्षेत्र तथा बंदरगाहों को बंद की जानकारी दी है. इसी तरह के कदम उठाते हुए बहरीन ने भी आरोप लगाया है कि कतर उसके अंदरूनी मामलों में दखल दे रहा है.

इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया में कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान ज़ारी कर कहा, ‘जो क़दम उठाए गए हैं वे अन्यायपूर्ण और झूठे दावों पर आधारित हैं. इनका मक़सद एकदम साफ है. ये देश कतर को अपनी छत्रछाया में लेना चाहते हैं. यह अपने आप में कतर की संप्रभुता उल्लंघन है.’