भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पेरिस समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. तीन साल पूरे होने पर अपने कामकाज का ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत ने जलवायु परिवर्तन संबंधी पेरिस समझौते पर किसी दवाब या पैसे के लालच में हस्ताक्षर नहीं किए थे.’ पिछले हफ्ते पेरिस समझौते से अलग होने की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया था कि भारत ने अरबों डॉलर की विदेशी सहायता पाने के लिए इस पर हस्ताक्षर किए हैं.

पेरिस समझौते को अमेरिकी हितों के खिलाफ बताते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे हटने का ऐलान कर चुके हैं. उन्होंने इसे भारत और चीन के पक्ष में झुका बताया था. उन्होंने कहा था, ‘भारत को 2020 तक अपना कोयला उत्पादन दोगुना करने की छूट होगी. इस पर सोचिए. भारत कोयला उत्पादन दोगुना कर सकता है और हमसे उम्मीद की जा रही है कि हम इसे छोड़ दें.’ 2015 में हुए पेरिस समझौते पर अब तक दुनिया के लगभग 200 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं. लेकिन सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले देशों की सूची में दूसरे नंबर पर मौजूद अमेरिका अब इससे बाहर हो चुका है.

हालांकि, सोमवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से भारत और अमेरिका के रिश्तों की प्रगति पर कोई असर नहीं पड़ा है. अपने मंत्रालय की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. सुषमा स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की कोशिशों के चलते जरूरत पड़ने पर दुनिया के सभी देश भारत की मदद के लिए तैयार हो जाते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बीते तीन साल में विदेश में फंसे 80,000 से ज्यादा भारतीयों को देश वापस लाने में सफलता मिली है.