क्रिकेट के खेल में तकनीक की भूमिका दिन-ब-दिन बढती जा रही है. पिछले दिनों इस खेल की अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीसी ने दो और अहम फैसले लिए हैं. ये दोनों फैसले इस बार इंग्लैंड में खेली जा रही चैंपियंस ट्रॉफी से अमल में लाये जा रहे हैं. पहला फैसला बल्लेबाजों से जुड़ा है जिसमें बल्लेबाज को अपने बल्ले में एक विशेष तरह का चिप लगाने की इजाजत दी गई है. यह चिप मशहूर तकनीकी कंपनी इंटेल ने तैयार किया है.

इंटेल के मुताबिक इस चिप में ख़ास तरह के सेंसर्स लगाए गए हैं. ये सेंसर्स खेलते समय खिलाड़ी के बल्ला घुमाने की गति, शॉट खेलते समय बल्ले के द्वारा बनाया गया कोण और गेंद खेलते वक्त बल्ले की स्थिति से संबंधित सारा डेटा सेव करेंगे. माना जा रहा है कि इस डेटा की मदद से बल्लेबाजों को अपने खेल की तकनीक सुधारने में मदद मिलेगी.

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तकनीक से जुड़े दूसरे अहम फैसले के पीछे भी इंटेल की ही मुख्य भूमिका है. इंटेल ने पिच का मिजाज समझने के लिए एक खास तरह का ड्रोन तैयार किया है. इंटेल फैल्कॉन ड्रोन-8 नाम का यह ड्रोन पिच का सटीक आकलन करने में मदद करेगा. कंपनी की मानें तो इसमें अत्याधुनिक एचडी और इंफ्रारेड कैमरे लगाए गए हैं जो पिच से जुड़ी हर बारीकी को उजागर करेंगे. बताया जाता है कि ये कैमरे पिच की तस्वीरें लेंगे और पिच से जुड़ी हर जानकारी को एक स्क्रीन पर दिखायेंगे. इसमें पिच पर घास की सही स्थिति, उस पर ओस की मौजूदगी, पिच का सूखापन और उस पर पड़े फुटमार्क्स सहित तमाम जानकारियां होंगी. इससे पहले तक कमेंटेटर पिच पर जाकर अपने अनुभव के आधार पर पिच की स्थिति के बारे में बताते थे.

अब गूगल के एंड्रॉयड में गड़बड़ियां ढूंढने पर 1.28 करोड़ का इनाम मिलेगा

हाल ही में गूगल प्ले स्टोर में एक बड़ा बग सामने आने के बाद गूगल सुरक्षा को लेकर और ज्यादा गंभीर हो गई है. कंपनी ने अपने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) में बग ढूंढ़ने पर दी जाने वाली पुरस्कार राशि को बढ़ाकर दो लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1 करोड़ 28 लाख रुपये कर दिया है.

खबरों के अनुसार गूगल को लगता है कि लोग उनके ओएस में बग ढूढने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं और इसीलिए पिछले एक साल से सिस्टम में बड़ा बग मौजूद होने के बाद भी लोग उसे नहीं ढूंढ पाये. गूगल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बग ढूंढने के लिए उत्साहित करने के लिए ही कंपनी ने पुरस्कार राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है.

हाल में गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद कई ऐप्स में ‘जुडी’ नामक मैलवेयर पाया गया था जिसने दुनिया भर में करीब 4 करोड़ एंड्रॉयड यूजर्स को नुकसान पहुंचाया था. यह बग साइबर सुरक्षा पर शोध करने वाली इजरायली कंपनी ‘चेक पॉइंट’ ने ढूंढा थी. चीन में बने करीब 41 ऐप्स में यह मेलवेयर पाया गया था जिसके बाद इन सभी को प्ले स्टोर से हटाया गया. चेक पॉइंट के मुताबिक यह मेलवेयर अप्रैल 2016 से इन ऐप्स में मौजूद था.

एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की तकनीकी में गड़बड़ियां निकालने यानी बग ढूंढने की यह योजना गूगल ने 2015 में शुरू की थी. इसके तहत कंपनी साइबर सुरक्षा से जुडी कंपनियों और लोगों को अपने ओएस में कमियां ढूंढने के लिए प्रेरित करती है. अभी तक यह पुरस्कार राशि करीब 10 हजार डॉलर से 50 हजार डॉलर थी. यह राशि समस्या की गंभीरता के हिसाब से दी जाती है. बीते दो सालों में कंपनी ने कई लोगों को बग ढूढने पर कुल नौ करोड़ रुपए दिए हैं. लेकिन इसके बावजूद गूगल का कहना है कि लोग सबसे बड़ा बग ढूंढ कर सबसे बड़ी राशि यानी राशि यानी 50 हजार डॉलर नहीं जीत पाए हैं.

फेसबुक के इस नए ऐप से माता-पिता बच्चे पर ऑनलाइन निगरानी रख सकेंगे

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक जल्द ही टीनएजर्स के लिए एक नया मैसेजिंग ऐप लाने की तैयारी कर रही है. तकनीक से जुडी मशहूर पत्रिका ‘द इन्फॉर्मेशन’ ने इस ऐप के बारे में जानकारी दी है. पत्रिका के मुताबिक यह ऐप न केवल अभिभावकों को अपने बच्चों की ऑनलाइन निगरानी रखने अनुमति देगा बल्कि इससे टीनएजर्स को ऑनलाइन शोषण और मिसगाइड होने से भी बचाया जा सकेगा.

‘टॉक’ नाम के इस ऐप से माता-पिता बच्चे की गतिविधियों को पूरी तरह नियंत्रित कर सकेंगे. वे यह भी जान सकेंगे कि उनका बच्चा ऑनलाइन किस-किस के संपर्क में रहता है. पत्रिका के अनुसार इस मैसेजिंग ऐप को 13 साल या इससे ज्यादा उम्र के टीनएजर्स ही इस्तेमाल कर सकेंगे. ख़ास बात यह है कि इसका इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता या बच्चे को फेसबुक अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, फेसबुक की ओर से इस ऐप के बारे में अभी कोई बयान नहीं दिया गया है.