अब तक मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में ही सिमटे नक्सली नए क्षेत्र तलाश रहे हैं. या कहें कि उन पुराने इलाकों में नए सिरे से प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं जहां वे पहले कभी सक्रिय हुआ करते थे. इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक इन इलाकों में नक्सली दंडकारण्य विशेष क्षेत्र समिति (डीएसज़ेडसी) जैसी ही एक इकाई गठित करने की फिराक में हैं.

ख़बर के मुताबिक छत्तीसगढ़ पुलिस को इसी अप्रैल में नक्सलियों का 25 पन्नों का एक गोपनीय दस्तावेज़ हाथ लगा है. इससे पता चलता है कि नक्सली अब एमएमसीज़ेड (महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ कंफ्लुएंस ज़ोन) के गठन की कोशिश में हैं. इस क्षेत्र में मध्य प्रदेश के बालाघाट, महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव के उत्तर का इलाका शामिल है. इस नए इलाके में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह जिले- कबीरधाम और मुंगेली को भी शामिल किया गया है.

सूत्र बताते हैं कि दस्तावेज़ में नई इकाई के गठन की दिशा में साल भर में हुई प्रगति का विवरण हैं. साथ ही नए क्षेत्रों में कौन से मुद्दे और किस तरह की समस्याएं हैं यह भी उल्लेख किया गया है. इनमें ख़ास तौर पर विभिन्न राज्यों में बांस की अलग-अलग कीमतें, ज़मीन संबंधी समस्याओं और यहां तक कि नोटबंदी के बाद ग्रामीणों के सामने पैदा हुईं नई परिस्थितियों का ज़िक्र है. साथ ही नेतृत्व को सुझाव दिया गया है कि इन इलाकों के ग्रामीणों का भरोसा जीतने के लिए इन मुद्दों पर ध्यान देना होगा.

पुलिस अफसरों के मुताबिक यह दस्तावेज़ उन लोगों ने तैयार किया है जो एमएमसीज़ेड के गठन का काम देख रहे हैं. इसी मार्च में तैयार हुआ यह दस्तावेज़ इसका प्रमाण भी है कि आठ साल में पहली बार नक्सली नए इलाकों की तरफ रुख़ कर रहे हैं. अख़बार से बातचीत में छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी अभियान के विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी कहते हैं, ‘हां ये सही है कि वे (नक्सली) एमएमसीज़ेड बनाने की कोशिश में हैं. हमें इसकी जानकारी भी है. हम उनकी कोशिश विफल करने की रणनीति बना रहे हैं.’