लगता है आप (आम आदमी पार्टी) के संस्थापकों में से एक कुमार विश्वास और पार्टी नेतृत्व के बीच अब भी सब ठीक नहीं है. कुमार को शांत करने के लिए पार्टी ने उन्हें राजस्थान का प्रभारी बनाया था. लेकिन वे अब राजस्थान के पार्टी कार्यकर्ताओं में इस तरह से जोश भर रहे हैं कि शीर्ष पर बैठे नेता ही अशांत हो सकते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बीते शनिवार को ही आप की राजस्थान इकाई के कार्यकर्ताओं की कुमार ने बैठक ली थी. इसमें उन्होंने कहा, ‘दिल्ली (पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व) के असर के दिन अब लद गए. पार्टी की राजस्थान इकाई अब स्थानीय कार्यकर्ताओं की इच्छाआें के मुताबिक चलेगी. अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के लिए ख़ुद ही वित्तीय संसाधन (फंड) जुटाएगी.’ उन्होंने राज्य इकाई के लिए नियम-कायदे भी तय किए. जैसे- प्रचार सामग्री में केंद्रीय नेतृत्व के किसी नेता की तस्वीर नहीं होगी. सिर्फ राज्य के नेताओं की तस्वीरें होंगी. जो नेता एक साल के भीतर पार्टी में शामिल हुआ है उसे टिकट नहीं दिया जाएगा. आदि

यही नहीं कुमार ने अपने भाषण के दौरान पंजाब और गोवा में अपनाई गई पार्टी की रणनीति की आलोचना भी की. बताते चलें कि शक्ति और सत्ता के ज़रूरत से ज़्यादा केंद्रीयकरण के लिए कुमार पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना कर चुके हैं. उन्हाेंने 28 अप्रैल को मीडिया से बातचीत में तो यहां तक कह दिया था कि आप को हाल के विधानसभा चुनावों में पराजय के लिए आत्मविश्लेषण करना चाहिए न कि ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को दोष देना चाहिए. उस वक्त उन्होंने पार्टी से अलग रास्ता अख़्तियार करने के भी संकेत दे दिए थे. लेकिन अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं ने उन्हें मना लिया था.