खुद को चीन से अलग एक स्वतंत्र देश बताने वाले ताइवान का एक और सहयोगी ने साथ छोड़ दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पनामा गणतंत्र ने ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ते हुए उसे चीन का हिस्सा मानने वाली ‘वन चाइना पॉलिसी’ को स्वीकार कर लिया है. मंगलवार को बीजिंग में पनामा की उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री इसाबेल सेंट मालो डि अलबर्दो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की बैठक में इससे जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए.

रिपोर्ट के मुताबिक पनामा के फैसले पर ताइवान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ताइवान ने पनामा पर वर्षों पुरानी दोस्ती को अनदेखा करने और आर्थिक हितों के लिए चीन के साथ जाने का आरोप लगाया है. हालांकि, पनामा ने ताइवान से रिश्ता तोड़ने के बारे में कोई सफाई नहीं दी है. लेकिन, चीन के साथ उसकी बढ़ती आर्थिक साझेदारी को इस फैसले के पीछे की प्रमुख वजह माना जा रहा है. इस बीच ताइवान ने कहा है कि वह आर्थिक प्रलोभन के जरिए सहयोगियों को जोड़ने के मामले में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करेगा.

पिछले साल दिसंबर में पश्चिम अफ्रीकी देश साओ टोम एंड प्रिंसेप ने ताइवान से राजनयिक संबंध तोड़ते हुए ‘वन चाइना पॉलिसी’ को स्वीकार कर लिया था. साओ टोम और पनामा गणतंत्र के अलग होने के बाद ताइवान के पास केवल 20 देशों का ही समर्थन बचा है. इनमें स्विटजरलैंड और ग्वाटेमाला को छोड़कर ज्यादातर देश बहुत छोटे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि पिछले साल दिसंबंर में अमेरिका के तत्कालीन निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ताइवान का समर्थन करने के बाद चीन ने उसको लेकर अपना रुख बदल दिया है. अब वह एक-एक कर ताइवान के सहयोगियों को अलग कर अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है.