गर्मियों की छुटि्टयों के बाद देश के कई हिस्सों में गुरुवार से नए शिक्षा सत्र के लिए स्कूल फिर खुल गए. इसके साथ ही तमाम सरकारी और निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया भी ज़ारी है जिसमें करीब-करीब हर शहर-गांव में बच्चों को निज़ी स्कूलों में भर्ती कराने की आपाधापी नज़र आती है. लेकिन इस बीच तेलंगाना के जगिताल जिले का पोथरम गांव पूरे देश के लिए ऐसी मिसाल बनकर सामने आया है जो कम ही देखने-सुनने को मिलती है. इस गांव की पंचायत ने नियम बना रखा है कि अगर कोई अभिभावक अपने बच्चे को निजी स्कूल में भर्ती कराना चाहता है तो उसे 50,000 रुपए का जुर्माना अदा करना होगा.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पोथरम इस जिले के कठलपुर मंडल का छोटा सा गांव है. लेकिन उसकी सोच बड़ी है. इस गांव का हर बाशिंदा अब यहां मौज़ूद इकलौते सरकारी स्कूल को समर्थन, सहयोग और मज़बूती देना चाहता है. यही वज़ह कि यहां के सभी अभिभावक अपने बच्चों को सिर्फ इसी सरकारी स्कूल में भेजते हैं. इस सिलसिले में गांव की पंचायत ने कुछ महीने पहले ही बाक़ायदा एक संकल्प भी पारित किया है.

पंचायत के संकल्प के मुताबिक अगर कोई अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूल में भेजना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है. लेकिन उसे इसके एवज़ में 50,000 रुपए के जुर्माने की रकम पंचायत के कोष में जमा करानी होगी. जुर्माने से मिली रकम को गांव के विकास कार्याें और सरकारी स्कूल की ज़रूरतों पर ख़र्च किए जाने का प्रावधान है. हालांकि अभी किसी अभिभावक के सामने जुर्माना चुकाने की नौबत नहीं आई है.

पंचायत के एक सदस्य के मुताबिक यह स्कूल भी आम सरकारी स्कूलों की तरह नहीं है. स्कूल में दो स्थायी शिक्षक हैं. इनमें एक प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक शामिल है. कक्षा एक से पांचवीं तक के इस स्कूल में दो साल पहले अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था भी की जा चुकी है. बाकी इंतज़ाम भी दूसरे सरकारी स्कूलों की तुलना में बेहतर करने की कोशिश लगातार की जा रही है.

पंचायत सदस्य बताते हैं कि पहले गांव के ज़्यादातर लोग अपने बच्चों को नज़दीकी गांव रुद्रांगी के निजी स्कूल में भेजते थे. लेकिन इस साल गांव के युवाओं ने बीड़ा उठाया कि अब स्थानीय सरकारी स्कूल में ही इंतज़ाम दुरुस्त किए जाएं. उन्होंने ही अभिभावकों को प्रेरित किया कि वे बच्चों को गांव के ही स्कूल में भेजें. धीरे-धीरे उन्हें लोगों और फिर पंचायत का भी समर्थन मिलता गया और आज उनकी पहल मिसाल बन रही है.