इम्तियाज अली अपनी फिल्मों को अपनी ट्रैवल डायरी बताते हैं. यह सच भी है क्योंकि उनकी फिल्मों का विषय चाहे जो भी हो उनके पात्र सफर पर जाते जरूर दिखते हैं. उनकी यह यात्रा देश-विदेश के सबसे खूबसूरत ठियों से गुजरती है. यह ठिया (लोकेशन) ‘जब वी मेट’ में नजर आया हरा-भरा पंजाब भी हो सकता है और ‘लव आज कल’ का लुभाता लंदन भी.

साल 2005 में रिलीज हुई उनकी पहली फिल्म ‘सोचा न था’ से ही उन्होंने दर्शकों को अपने अलहदा अंदाज की सिनेमाई यात्रा का स्वाद लगा दिया था. उनके ये सफर रूमानी और रूहानी होने के साथ-साथ किसी नई जगह की खोज भी करते हैं. जैसे - साल 2015 में आई फिल्म ‘तमाशा’ के दोनों मुख्य पात्र फ्रांस में कोर्सिका नाम की जगह पर एक-दूसरे से पहली बार मिलते हैं. दर्शको के लिए परदे पर पहली बार नजर आई यह जगह जितनी अनदेखी थी, उतनी ही अनोखी भी.

सिनेमाघर के टिकट पर पर्यटन कराने वाले इस फिल्मकार के प्रोडक्शन हाउस का नाम भी ‘विंडो सीट फिल्म्स’ है. लेकिन हम इसे इम्तियाज अली टुअर एंड ट्रैवल्स भी कह सकते हैं, जैसा कि यह वीडियो कहता है: