राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर सरकार और विपक्ष दोनों ही खेमों में चर्चा की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन जिन नेताओं के बीच चर्चा चल रही है उन्हें भी अभी तक किसी उम्मीदवार का नाम नहीं पता है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू को उस कमेटी का सदस्य बनाया जो विपक्ष के नेताओं से राष्ट्रपति के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा कर रहे हैं. लेकिन ये तीनों भी नहीं जानते कि उन्हें किसके नाम पर सहमति बनानी है.

सुनी-सुनाई है कि भाजपा अध्यक्ष ने इन तीन नेताओं को सिर्फ काम बताया है, नाम नहीं बताया. इन नेताओं को विपक्ष से बात करने का जिम्मा सौंपा गया है. इनसे कहा गया है कि ये विपक्ष से समर्थन किसी उम्मीदवार के नाम पर नहीं, एनडीए के नाम पर लें. मीडिया में खबर उड़ी कि प्रधानमंत्री ने एक कोर कमिटी की बैठक बुलाई है और राष्ट्रपति के उम्मीदवार पर चर्चा हुई. लेकिन सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि प्रधानमंत्री ने इस बैठक में भी राष्ट्रपति चुनाव का जिक्र तक नहीं किया.

अभी अरुण जेटली कोरिया के दौरे पर हैं, इसलिए राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू ही विपक्ष के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं. इसी सिलसिले में वेंकैया ने बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा और एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल से बात की. शुक्रवार को राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिल रहे हैं. जो खबर उड़ती-उड़ती होते हुए भी पक्की लगती है वह यह कि हर बार की तरह इस बार भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी कोई चौकाने वाला नाम सामने रखकर उसका ऐलान एकदम आखिरी वक्त में कर सकती है.

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 25-26 जून से मुलाकात तय है. उम्मीद है कि एनडीए 23 जून को अपने उम्मीदवार का नामांकन भर सकता है जिसमें प्रधानमंत्री खुद शामिल होंगे. इससे पहले भाजपा सभी पार्टियों से एक राउंड बातचीत कर लेना चाहती है.

अमित शाह की बनाई कमिटी में शामिल तीनों नेताओं को अलग-अलग पार्टी के नेताओं से बात करने का जिम्मा सौंपा गया है. अरुण जेटली के रिश्ते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से अच्छे हैं. इसलिए जेटली उनसे समर्थन मांगेंगे.

शिवसेना हर रोज़ मोहन भागवत को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने की मांग कर रही है और मोहन भागवत इंकार कर चुके हैं. शिवसेना से बात करने की जिम्मेदारी राजनाथ सिंह को दी गई है. इस वक्त भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में राजनाथ के संबंध ठाकरे परिवार से अच्छे माने जाते हैं.

वेंकैया नायडू दक्षिण में एआईडीएमके के दोनों गुटों के संपर्क में हैं. इसके अलावा वे तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश में विपक्ष के नेता जगन मोहन रेड्डी से भी बात कर रहे हैं.

अरुण जेटली 17 जून को विदेश से लौटेंगे. 18 जून से बैठकों में तेजी आएगी. 18 से 21 जून तक भाजपा बिना नाम बताए समर्थन जुटाएगी और ऐसा करते हुए खुद को दिखाएगी. और 22 जून के बाद अचानक देश के सामने नए राष्ट्रपति के उम्मीदवार का नाम खोला जा सकता है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का स्टाइल है. वे आखिरी वक्त तक सस्पेंस बना कर रखते हैं और मीडिया में जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा होती है वह नाम गलत हो जाता है. राष्ट्रपति चुनाव में भी ऐसा ही हो तो उसमें कोई अचरज की बात नहीं होगी!