शिवराज जी यह बताइए कि अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों पर मध्य प्रदेश पुलिस ने फायरिंग क्यों की?

देखिए जी, मध्य प्रदेश पुलिस को तो छोड़िए, पूरे देश की पुलिस का यह हाल है कि ज्यादातर पुलिसकर्मियों की बंदूकों में जंग लग जाती है और वे पूरी नौकरी भर एक बार भी फायर नहीं कर पाते. तो आंदोलन वगैरह में फायर-वायर करने से उनकी प्रैक्टिस बनी रहती है.

यानी आप मान रहे हैं कि पुलिस फायरिंग में ही किसानों की मौत हुई है, लेकिन पहले आपने इस बात से इनकार क्यों किया था?

देखिये एक सच्चे नेता के इनकार और इकरार के बीच बालभर का भी फर्क नहीं होता, अब्ब्ब...मेरा मतलब आपने इकरार को ही इनकार समझ लिया होगा.

आंदोलन में हुई हिंसा के पीछे आप जिन असामाजिक तत्वों का हाथ बता रहे हैं, वे कौन लोग हैं?

विपक्ष के लोग और कौन!

लेकिन खबर तो यह है कि मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन को भड़काने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ पूर्व सदस्यों का हाथ है और इनमें से कई भाजपा के करीबी भी हैं.

(खीजते हुए) आप जानती नहीं, आस्तीन के सांप पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में ही पाए जाते हैं!

आपके ही कार्यकाल के दौरान 2011 में हुए किसान आंदोलन में भी मध्य प्रदेश पुलिस ने किसानों पर फायरिंग की थी. ऐसे में आप खुद को किसान सहयोगी सरकार कैसे कह सकते हैं?

मारे गए सभी किसानों के परिवारों को हमने एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की बात की है. मरे हुए किसान की कीमत हमने जिंदा किसान से ज्यादा आंकी है और इसके बाद भी आपको हमारे किसान सहयोगी होने में शक है!

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि किसानों की कर्ज माफी का भार राज्यों को खुद उठाना होगा, इस पर आपको क्या कहना है?

जेटली जी, अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा करके खुद तो 20 करोड़ रुपये कमाने की जुगत में हैं और इधर हम लोगों के प्रति यह रवैया दिखा रहे हैं. उन्हें वित्त मंत्री के बजाय किसी राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया जाना चाहिए, तब उन्हें अपने कहे का अहसास होगा.

आपने राज्य में शांति बहाल करने के लिए अनिश्चितकालीन उपवास की बात की थी, लेकिन फिर दो दिन में उपवास क्यों खत्म कर दिया?

लगातार कई शादियों में खाना खाकर मेरा पेट गड़बड़ हो गया था. मैंने सोचा कि पेट में टिक तो कुछ वैसे भी नहीं रहा तो क्यों न उपवास...अब्ब्ब... मेरा मतलब मैं किसानों की भुखमरी के दर्द को खुद भूखे रहकर महसूस करना चाहता था, इसलिए उपवास किया. आज फिर से किसी खास की शादी में जाना है, सो उपवास खत्म करना पड़ा. रही बात मेरे अनिश्चितकालीन उपवास की, तो यह बात विपक्ष ने ही फैलाई होगी, ताकि वह फिर मुझे बदनाम करके कह सके कि मैं अपने वादे से मुकर गया.

सुनने में आ रहा है कि पार्टी का एक वर्ग आपकी घटती लोकप्रियता को देखते हुए आपको मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहता है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

उन लोगों को समझना चाहिए कि लोकप्रियता से समस्याएं हल नहीं होतीं. यदि ऐसा होता तो मुम्बई में इस समय कोई समस्या ही नहीं बचती, क्योंकि देश के सबसे लोकप्रिय लोग मुम्बई में ही रहते हैं.

आपके उपवास के विरोध में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 72 घंटे के सत्याग्रह पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

हम सब एक-दूसरे की नौटंकी को अच्छे से.... अब्ब्ब...मेरा मतलब किसानों के लिए जिससे जो भी संभव हो रहा है, वह कर रहा है.

पिछले साल जेल से फरार होने वाले सिमी के आठ आतंकियों का एनकाउंटर संदेह के घेरे में है. इस बारे में आपका क्या कहना है?

देखिये, कब, किसका और कैसे एनकाउंटर करना है, इस मामले में पुलिस कहां कोई निष्पक्षता बरतती है! अब्ब्ब...मेरा मतलब कि हमने निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं, जल्द ही सच सामने आ जाएगा.

अच्छा, यह बताइये कि एनकांउटर करने वाले तीन घायल पुलिसकर्मी गायब कैसे हो गए थे?

जिस देश के लिए सुभाषचन्द्र बोस जैसी महान हस्ती आज तक गायब है, उसके लिए उन तीन साधारण पुलिसकर्मियों की भला क्या बिसात है!...वैसे भी हमारे देश में आम और खास लोगों के गायब होने की पुरानी परंपरा है. इस देश के जो बच्चे और लड़कियां आज भी बोस की गुमशुदगी की परंपरा को निभाने में चुपचाप अपना बलिदान दे रहे हैं, मुझे उन पर नाज है...वे तीन पुलिसकर्मी भी उसी परंपरा का हिस्सा बने हैं.

2013 से अभी तक लगभग 50 लोगों की रहस्यमयी तरीकों से मौत के साथ व्यापम घोटाला देश का सबसे बड़ा किलर स्कैम बन चुका है. आखिर इसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के पीछे क्या वजह है?

(खीजते हुए) पहले आप यह बताइये कि आपकी रुचि मौत में है या घोटाले में? मेरे राज्य में व्यापम से ज्यादा मौतें किसानों की हो चुकी हैं, लेकिन किसानों की मौतों के कारण पर तो आपने एक भी सवाल नहीं पूछा, फिर व्यापम से हुई मौतों को लेकर आपको इतनी जिज्ञासा क्यों है! मौतों पर राजनीति करना कब बंद करेंगे आप लोग...

कुछ समय पहले व्यापम घोटाले की तर्ज पर एमडी-एमएस की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में भी धांधली का मामला सामने आया है. आखिर इस तरह से अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराके आप एक सशक्त प्रशासन कैसे दे सकेंगे?

योग्यता की बात तो मत ही करिये. आप लोग मोदी जी तक को तो प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य मानते हैं! वैसे, आप जिस ऑनलाइन परीक्षा में धांधली की बात कर रही हैं, उस परीक्षा के सॉफ्टवेयर को हैक करने वालों को तो मैं पुरस्कृत करने की सोच रहा हूं. आने वाले समय में यही लोग हैं, जो तेजी से बढ़ते साइबर क्राइम से निपटने में सबसे योग्य साबित होंगे.

लेकिन इस तरह योग्य उम्मीद्वार बाहर नहीं रह जाएंगे?

इस देश को योग्य से ज्यादा ऐसे डॉक्टरों की जरूरत है, जो भूख से हुई मौत को, कुपोषण से हुई मौत को और यहां तक कि गोली से हुई मौत को सदमे से हुई मौत घोषित कर सकें... अब्ब्ब...मेरा मतलब है कि योग्यता और हुनर किसी डिग्री के मोहताज नहीं होते.