आम आदमी पार्टी (आप) में कुमार विश्वास और शीर्ष नेतृत्व के बीच छिड़ी तक़रार सड़क पर आ गई है. ख़बरों के मुताबिक दिल्ली में शनिवार सुबह आप मुख्यालय के बाहर कुछ पोस्टर लगे देखे गए हैं. इनमें कुमार विश्वास को ‘गद्दार’ बताया गया है. साथ ही उन्हें पार्टी से बाहर करने की मांग भी की गई है.

पोस्टरों में कुमार के लिए लिखा है, ‘भाजपा का यार है, कवि नहीं गद्दार है. छिप-छिप कर हमला करता है, वार पीठ पर करता है. ऐसे धोख़ेबाज़ों को बाहर करो, बाहर करो.’ अंत में पार्टी नेता दिलीप पांडे की तस्वीर है और उनके प्रति आभार ज़ताया गया है कि उन्होंने ‘कुमार विश्वास का काला सच खु़ुलकर बताया.’ बता दें कि दिलीप ने हाल में ही ट्विटर पर कुमार को संबाेधित करते हुए लिखा था, ‘भैया, आप कांग्रेसियों को खूब गाली देते हो, लेकिन कहते हो कि राजस्थान में वसुंधरा के खिलाफ नहीं बोलेंगे? ऐसा क्यों? लोगों में हमारी पार्टी के लिए सम्मान है, क्योंकि हमने भाजपा और कांग्रेस दोनों के भ्रष्टाचार पर हमले किए. लेकिन अब महारानी (वसुंधरा) पर हमले क्यों नहीं?’

यहां यह भी ज़िक्र करते चलें कि आप की राजस्थान इकाई के प्रभारी कुमार विश्वास ने अभी पिछले हफ्ते ही प्रदेश के नेताओं की बैठक ली थी. इसमें उन्होंने कहा था, ‘दिल्ली (पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व) के असर के दिन अब लद गए. पार्टी की राजस्थान इकाई स्थानीय कार्यकर्ताओं की इच्छा के मुताबिक चलेगी. अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के लिए ख़ुद फंड जुटाएगी.’ उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए नियम-कायदे भी तय किए थे. जैसे- प्रचार सामग्री में केंद्रीय नेतृत्व के किसी नेता की तस्वीर नहीं होगी. सिर्फ राज्य के नेताओं की ही तस्वीरें होंगी. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित किसी नेता पर निजी टिप्पणी के बज़ाय मुद्दों पर आधारित प्रचार करेंगे. आदि.’

बताते चलें कि शक्ति और सत्ता के ज़रूरत से ज़्यादा केंद्रीयकरण के लिए कुमार पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना कर चुके हैं. उन्हाेंने 28 अप्रैल को मीडिया से बातचीत में तो यहां तक कह दिया था कि आप को हाल के विधानसभा चुनावों में पराजय के लिए ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को दोष देने के बज़ाय आत्मविश्लेषण करना चाहिए. इस पर उन्हें पार्टी के नेता अमानतुल्ला खान ने ‘आरएसएस का एजेंट’ कह दिया था. इससे नाराज़ कुमार ने पार्टी से अलग रास्ता अख़्तियार करने के भी संकेत दे दिए. लेकिन पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं ने उन्हें मना लिया और राजस्थान का प्रभारी बना दिया था.