1 जून से शुरू हुई चैंपियंस ट्रॉफी में खिताबी मुकाबले की घड़ी आ पहुंची है. आज लंदन के ओवल मैदान पर खेले जाने वाले फ़ाइनल मुकाबले में भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी. फाइनल में पहुंचने वाली एशिया की इन दोनों टीमों में भारत का पलड़ा काफी भारी दिख रहा है. भारत खेल के हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद फाइनल में पहुंचा है तो दूसरी ओर पाकिस्तान की टीम ने फाइनल में पहुंचकर सभी को चौंका दिया है.

भले ही भारतीय टीम इसी टूर्नामेंट के लीग मैच में पाकिस्तान को बुरी तरह हरा चुकी हो, लेकिन माना जा रहा है कि अब पकिस्तान को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. फ़ाइनल मुकाबले में भारत का सामना एक ऐसी पाकिस्तानी टीम से होने जा रहा है जो दुनिया की नंबर एक टीम दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ श्रीलंका और इंग्लैंड को भी बुरी तरह शिकस्त दे चुकी है.

आज के मैच में ज्यादातर जानकार भारत की जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं. हालांकि, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि टूर्नामेंट में अब तक केवल भारत से ही हारने वाली पाकिस्तानी टीम चौंकाने की क्षमता रखती है. लेकिन ऐसा तब ही संभव है जब उसने इन चार समस्याओं का हल ढूंढ लिया हो.

कम से कम शिखर धवन, रोहित शर्मा और विराट कोहली को जल्द आउट करना

चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के अब तक के प्रदर्शन को देखें तो उसकी जीत में सबसे अहम योगदान शिखर धवन, रोहित शर्मा और विराट कोहली का रहा है. भारत की सलामी जोड़ी ने पिछले चार मैचों में से दो में 100 से ज्यादा और एक में 87 रन की साझेदारी की है जिसने भारत के बड़े स्कोर तक पहुंचने में बड़ी भूमिका निभाई है. शिखर धवन इस टूर्नामेंट में 79 के औसत से सर्वाधिक 317 रन बना चुके हैं. रोहित शर्मा 100 से ज्यादा के औसत से टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं.

इसके अलावा अगर कप्तान विराट कोहली की बात करें तो वे टूर्नामेंट के हर मैच के साथ और बेहतर होते जा आ रहे हैं. टूर्नामेंट में उनकी फॉर्म का पता इसी बात से चलता है कि चार परियों में उन्हें विपक्षी केवल एक बार ही आउट करने में सफल हुए हैं. पाकिस्तान के लिए कोहली इसलिए भी बड़ी समस्या हैं क्योंकि उन्हें पाक गेंदबाज खूब रास आते हैं. क्रिकेट विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्तान को अगर भारत को कम स्कोर बनाने से रोकना है तो उसे इन तीन बल्लेबाजों पर जल्द काबू पाना होगा.

बीच के ओवरों में पाक की रणनीति का भारत के खिलाफ कारगर साबित न होना

पाकिस्तान की गेंदबाजी ही उसकी सबसे बड़ी मजबूती मानी जाती है. चैंपियंस ट्रॉफी में उसकी गेंदबाज़ी रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा बीच के ओवरों में बल्लेबाजों पर दवाब बनाना रहा है. अब तक यह टीम जितने भी मैच जीती है उसमें उसकी यह रणनीति पूरी तरह कामयाब हुई है. दरअसल, इस रणनीति के तहत बीच के ओवरों में पाकिस्तान के स्पिनर रनगति को रोककर विपक्षी बल्लेबाजों को दवाब में ला देते हैं और इसी बीच कप्तान सरफराज एक ओर से तेज गेंदबाज हसन अली को गेंद थमाते हैं. विपक्षी बल्लेबाज दवाब हटाने के लिए तेज गेंदबाज पर रन मारने की कोशिश करते हैं और अपना विकेट गंवा बैठते हैं.

लेकिन, स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों को ही अच्छा खेलने वाले भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ पाकिस्तान ही नहीं हर टीम की ऐसी रणनीति पूरी तरह असफल रही है. बीच के ओवरों में लाख कोशिश के बाद भी विपक्षी गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों को सिंगल या डबल लेने से नहीं रोक पाते हैं जिससे स्कोर लगातार बढ़ता रहता है. ऐसे में उल्टा दबाव गेंदबाजों पर ही आ जाता है. जानकार कहते हैं कि पाकिस्तान को अगर दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और इंग्लैंड की तरह ही भारत को भी बड़ा स्कोर बनाने से रोकना है तो उसे भारत के खिलाफ भी इस रणनीति को कामयाब बनाना ही होगा.

डेथ ओवरों में अंकुश

भारत के खिलाफ पाकिस्तान की तीसरी सबसे बड़ी चुनौती अंतिम यानी डेथ ओवरों में भारतीय बल्लेबाजों द्वारा ताबड़तोड़ बनाए जाने वाले रनों पर अंकुश लगाना होगा. भारत ने टूर्नामेंट में अभी तक दो टीमों पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ पहले बल्लेबाजी की है. इन दोनों मैचों में डेथ ओवरों में बनाए गए रनों का अगर आकलन करें तो पाक के खिलाफ खेले गए 48 ओवर के मैच में भारत के 37 ओवर में केवल 192 रन थे. लेकिन, इसके बाद अंत के 11 ओवर भारतीय बल्लेबाजों ने 127 रन बनाकर 319 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया.

श्रीलंका के खिलाफ भी भारत ने अंतिम 10 ओवरों में 103 रन बनाए थे और स्कोर को 321 पहुंचा दिया था. यानी आखिर के ओवरों में 10 रन प्रति ओवर से ज्यादा के हिसाब से बनाकर 300 से पार का स्कोर खड़ा करना भारतीय टीम की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है.

हालांकि, पाकिस्तान के लिए अंतिम ओवरों में रन रोकने के लिहाज से रुम्मान रईस उम्मीद जगाते हैं. इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला अन्तरराष्ट्रीय मैच खेले रईस ने अंतिम ओवरों में इंग्लिश बल्लेबाजों पर ऐसा दवाब बनाया था कि वे अंतिम 11 ओवरों में कोई चौका या छक्का नहीं लगा पाए थे. गौर करने वाली बात यह भी है कि ऐसा तब हुआ था जब धाकड़ बल्लेबाज बेन स्टोक क्रीज पर मौजूद थे.

हालांकि, रईस को लेकर पाकिस्तानी कप्तान सरफराज की एक समस्या यह भी है कि उन्हें भारत के खिलाफ अंतिम 11 में कैसे चुनें, क्योंकि रईस को इंग्लैंड के खिलाफ प्रमुख पाकिस्तानी बॉलर मोहम्मद आमिर के चोटिल होने पर खिलाया गया था जो अब पूरी तरह फिट हो गए हैं.

तीन प्रमुख बल्लेबाजों का पूरी तरह फ्लॉप होना

पाकिस्तान की टीम जब चैंपियंस ट्रॉफी खेलने आई थी तो उसके चार प्रमुख बल्लेबाजों अजहर अली, मोहम्मद हफीज, बाबर आजम और शोएब मलिक को बल्लेबाजी की रीढ़ कहा जा रहा था. लेकिन, अभी तक के टूर्नामेंट में सलामी बल्लेबाज अजहर अली के अलावा बाकी के तीनों फ्लॉप रहे हैं. बाबर आजम ने पिछले मैचों में 8, 31, 10, 38, हफीज ने 33, 26, 1, 31 और मलिक ने 15, 16, 11 रनों की पारियां खेली हैं.

जानकार इनके न चलने के बावजूद पाकिस्तान की जीत की दो वजहें मानते हैं. एक तो अभी तक के सभी मैचों में पाकिस्तान ने पहले गेंदबाजी की. दूसरा पहले गेंदबाजी करते हुए उसके गेंदबाजों ने विपक्षी टीमों को कम स्कोर पर रोक दिया. इससे पाक बल्लेबाजों पर दवाब काफी कम हुआ और उन्होंने इस कम स्कोर को प्रमुख बल्लेबाजों के न चलने के बावजूद हासिल कर लिया. उसने अफ्रीका को 219 पर, श्रीलंका को 236 पर और इंग्लैंड को 211 रनों पर रोक दिया था.

लेकिन, भारत के खिलाफ पहले गेंदबाजी करने के बावजूद पाकिस्तान की यह रणनीति सफल नहीं हो सकी है. भारतीय बल्लेबाजों ने उसकी जमकर धुनाई करते हुए 319/3 का स्कोर खड़ा किया था. जानकार कहते है कि फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान अगर जीत की उम्मीद कर रहा है तो भारत के खिलाफ इन तीन बल्लेबाजों को आगे आकर जिम्मेदारी उठानी ही पड़ेगी.

इनके मुताबिक भारतीय टीम इतनी अच्छी फॉर्म में है कि यदि पाकिस्तान फिर उसके खिलाफ पहले गेंदबाजी करता है तो उसे 200 या 215 रनों पर रोकना नामुमकिन जैसा है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान को एक बड़े स्कोर का पीछा करना होगा. अगर पाक टीम पहले बल्लेबाजी भी करती है तो भी उसे भारत को 300 से ज्यादा का स्कोर ही देना होगा और ऐसा इन बल्लेबाजों के बिना अच्छा खेले संभव नहीं लगता.