चैंपियंस ट्रॉफी में सभी को चौंकाने वाली पाकिस्तान की टीम ने फाइनल मुकाबले में भारत को भी बड़ा झटका दिया. लंदन के ओवल मैदान पर खेले गए मुकाबले में उसने भारतीय टीम को 180 रन के बड़े अंतर से हरा दिया. भारतीय टीम पाकिस्तान द्वारा दिए गए 339 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 30.3 ओवर में मात्र 158 रन बनाकर आलआउट हो गई.

इस मैच में भारत के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पाकिस्तान को पहले बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित किया. पाकिस्तान की ओर से जबर्दस्त फॉर्म में चल रहे सलामी बल्लेबाज अजहर अली और फखर जमां ने टीम को एक शानदार शुरुआत दी. इन दोनों ने लगातार दूसरे मैच में शतकीय साझेदारी की. अपना चौथा अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच खेल रहे फखर जमां ने शतक जमाते हुए 114 रन बनाए, जबकि अजहर अली 59 रन बनाकर रन आउट हो गए.

हालांकि, फखर जमां के भाग्य ने भी उनका काफी साथ दिया. मैच के चौथे ओवर की दूसरी गेंद पर ही जसप्रीत बुमराह ने उन्हें आउट कर दिया था लेकिन वह नो बॉल हो गई. अजहर के आउट होने के बाद आए बाबर आजम ने भी 46 रन की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पारी खेली. आजम और फखर के आउट होने के बाद अंतिम ओवरों में अनुभवी बल्लेबाज मोहम्मद हफीज ने ताबड़तोड़ 37 गेंदों पर 57 रन बनाकर पाकिस्तान के स्कोर को 50 ओवर में 338 पर पहुंचा दिया.

भारत की ओर से गेंदबाजी की बात करें तो भुवनेश्वर कुमार के अलावा कोई भी गेंदबाज प्रभाव नहीं छोड़ सका. भुवनेश्वर ने इस हाई स्कोरिंग मैच में भी 10 ओवर में केवल 44 रन दिए और एक विकेट हासिल किया. साथ ही उन्होंने दो ओवर मेडन भी किए. भुवनेश्वर के अलावा अन्य प्रमुख गेंदबाज आर अश्विन, जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा काफी महंगे साबित हुए. इन तीनों ने 7 से ज्यादा की इकॉनमी से रन लुटाए.

इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत काफी ज्यादा खराब रही. पहले ही ओवर की तीसरी गेंद पर सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा को मोहम्मद आमिर ने शून्य पर एलबीडब्लू आउट कर दिया. इसके अगले ही ओवर में आमिर ने कप्तान विराट कोहली को भी पांच रन पर चलता कर दिया. पूरी सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिखर धवन भी इस मैच में पाकिस्तानी गेंदबाजी का सामना नहीं कर सके और 21 रन बनाकर आमिर की गेंद पर विकेट कीपर को कैच थमा बैठे. इसके बाद आए युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी भी ज्यादा देर नहीं टिक सके.

एक समय भारत के 76 रन पर छह विकेट गिर गए थे और लग रहा था कि शायद 100 रन का आंकड़ा भी नहीं पार हो पाएगा. लेकिन, इसके बाद हरफनमौला हार्दिक पांड्या ने मोर्चा संभाला और रविंद्र जडेजा के साथ सातवें विकेट के लिए 80 रन की साझेदारी की. पांड्या की ताबड़तोड़ पारी को देखते हुए लगा कि भारत एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंच जाएगा. लेकिन, पांड्या भी 26वें ओवर में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गये. पांड्या के जाने के बाद कोई भारतीय बल्लेबाज पिच पर नहीं टिक सका और पूरी टीम 158 रन पर आलआउट हो गई.

पाकिस्तान की ओर से सभी गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया. तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर और हसन अली ने 3-3 विकेट झटके. जबकि, स्पिनर शादाब खान 2 और जुनैद खान को एक सफलता हासिल हुई. इस मैच में शानदार शतकीय पारी खेलने वाले फखर जमां मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए जबकि, टूर्नामेंट में सर्वाधिक 13 विकेट लेने वाले हसन अली को चैंपियंस ट्रॉफी 2017 का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया. भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को टूर्नामेंट में सर्वाधिक 338 रन बनाने के लिए ‘गोल्डन बैट’ से सम्मानित किया गया.

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर जहाँ पाकिस्तान ने इतिहास रचा है. वहीं, इस फाइनल मुकाबले में हारकर भारतीय टीम ने कई तरह के अनचाहे रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं. यह हार टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों का दर्जा हासिल करने वाली किसी टीम की चैंपियंस ट्रॉफी में हुई अब तक की सबसे बड़ी हार है. इससे पहले साल 2002 में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश को 167 रन से हराया था. भारतीय टीम ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया है. वह आईसीसी के किसी टूर्नामेंट के फाइनल में सबसे बड़े अंतर से हारने वाली टीम भी बन गई है. हालांकि, इससे पहले भी यह रिकॉर्ड भारत के ही नाम था जब वह 2003 विश्वकप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से 125 रन से हारा था.