सोमवार को लगभग सभी को चौंकाते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी बनाने का ऐलान कर दिया. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कल एक प्रेंस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की. बहुमत का आंकड़ा एनडीए के पक्ष में होने के चलते पूरी संभावना है कि रामनाथ कोविंद देश के अगले राष्ट्रपति बनने मेंं कामयाब रहेंगे.

इस घोषणा के साथ ही साफ हो गया कि रामनाथ कोविंद ‘डार्क हॉर्स’ थे. राजनीति के तमाम धुरंधर और पत्रकार उनके नाम का अंदाजा नहीं लगा सके. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के एक यूजर ललित कुमार मिश्रा ने 15 जून को ही कह दिया था कि रामना​थ कोविंद एनडीए से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी हो सकते हैं. अमित शाह के कल के ऐलान के बाद ट्विटर पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. उन्हें जाने-माने पत्रकारों की ओर से भी बधाइयां मिल रही हैं. वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद ललित को बधाई देते हुए लिखा, ‘आप सही थे. क्या आप बिहार से हैं?’

वहीं हिंदू की पत्रकार निस्तुल्ला हेब्बर ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘शायद इकलौता शख्स जो सही साबित हुआ.’ ललित मिश्रा का यह आकलन निस्तुल्ला हेब्बर द्वारा शुरू किए गए एक सर्वेक्षण के दौरान ही आया था. उस सर्वेक्षण में सबसे आगे सुषमा स्वराज चल रही थीं. इस सर्वेक्षण में झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु और लालकृष्ण आडवाणी क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर थे. ललित ने उसी सर्वेक्षण में भाग लेते हुए लिखा था, ‘बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद भी डार्क हॉर्स हो सकते हैं.’ ​

मशहूर पत्रकार बरखा दत्त ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से ललित मिश्रा को एकमात्र सही आकलन करने वाला शख्स बताया.

मोदी-शाह की जोड़ी ने चौंकाने की ठान रखी थी

मीडिया में अगले राष्ट्रपति के नाम को लेकर खूब अटकलें लग रही थीं. सुषमा स्वराज, लालकृष्ण आडवाणी, थावर चंद गहलोत, करिया मुंडा, द्रौपदी मुर्मु, ई श्रीधरन जैसे नाम अलग-अलग मीडिया समूहों की जुबान पर थे. विभिन्न पत्रकार अपने-अपने सूत्रोंं के हवाले अगले राष्ट्रपति के नाम का दावा कर रहे थे. लेकिन ऐसा लगता है ​मोदी-शाह की जोड़ी ने ठान लिया था कि वे ऐसा नाम ही चुनेंगे जिसके बारे में मीडिया या किसी को तनिक भी भनक नहीं हो.

भले ही इस बारे में किसी का आकलन सही साबित हो गया पर ऐसा करने वाले ललित खुद मानते हैं कि ‘वे कोई जादूगर नहीं है. उन्होंने केवल तुक्का लगाया था.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपनी पार्टी और देश में इतने मजबूत हो गए हैं कि उन्हें अपना निर्णय मनवाने के लिए ​किसी तीसरे का मुंह नहीं जोहना पड़ता. वे जो सोचते हैं उसे सबसे पहले अपनी पार्टी, फिर सरकार और अंत में देश में लागू करवा लेते हैं. यही वजह है कि उनके निर्णयोंं का केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है, जैसा ट्विटर के इस यूजर ने किया. मोदी-शाह के निर्णयों की सटीक जानकारी तभी मिल सकती है जब ये दोनों शीर्ष नेता चाहें. जानकारों के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव इसका सबूत है. आखिर उस तीन सदस्यीय समिति को भी, जिसे राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए बनाया गया, कहां मालूम था कि उम्मीदवार कौन होगा!