Play

उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर में आज भी एक सदियों पुरानी परंपरा जीवित है. रमजान के दौरान यहां हर रोज सुबह और शाम को गोला दागा जाता है. माना जाता है कि यह प्रथा सदियों पहले मिस्र में शुरू हुई थी. तब आम रोजेदारों को इफ्तार और सहरी का समय बताने के लिए तोप से गोला दागा जाता था. घडी, अलार्म, और लाउडस्पीकर आ जाने से धीरे-धीरे यह चलन दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में समाप्त होने लगा. लेकिन बिजनौर सहित कुछेक शहरों ने आज भी इस चलन को सहेजा हुआ है. हालांकि बिजनौर में तोप की जगह अब एक लोहे की एक नाल ने ले ली है.

यहां रोज़ा खोलने के लिए तमाम शहरवासी इस गोले के धमाके का इंतज़ार करते हैं. इसके बाद ही शहर में इफ्तार शुरू होती है.

रमजान के महीने में देश के किसी और शहर की तरह ही यहां का माहौल भी काफी बदला-बदला रहता है. इस दौरान शहर के कई हिस्सों में पूरी-पूरी रात रौनक बनी रहती है. रात करीब दो बजे से सहरी की तैयारियां शुरू होती हैं. कुछ लोग लोगों को सहरी के लिए जगाने का काम भी करते हैं. इसके अलावा रोजा शुरू और ख़त्म होने के समय को यहां लगातार लाउडस्पीकर से भी बताया जाता है. लेकिन फिर भी लोगों को गोले के धमाके का ही इंतज़ार रहता है जो शाम को रोज़ा तोड़ने का समय बताता है और सुबह इसके शुरू होने का.