चीन ने भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में दाखिल होने का एक बार फिर विरोध किया है. स्विट्जरलैंड के बर्न में चल रहे एनएसजी के पूर्ण सत्र के बीच चीन ने शुक्रवार को यह बात दोहराई. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, ‘जहां तक एनपीटी (परमाणु अप्रसार समझौता) से बाहर रहने वाले देशों की बात है, इस पर चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है.’

चीन के इस बयान से साफ हो गया है कि एनएसजी में भारत को प्रवेश पाने में अभी और वक्त लगेगा. इससे पहले पिछले साल सियोल में हुए एनएसजी के पूर्ण सत्र के दौरान भी चीन ने एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध किया था. एनएसजी वैश्विक स्तर पर परमाणु व्यापार पर नियंत्रण के लिए फैसले करता है.

चीनी प्रवक्ता गेंग ने आगे कहा, ‘सियोल में हुए पूर्ण सत्र में भी स्पष्ट कर दिया गया था कि इस मुद्दे का किस प्रकार समाधान करना है. हमें इन नियमों के अनुसार सहमति से काम करने की जरूरत है.’ उन्होंने कहा, ‘नए सदस्यों को एनएसजी में शामिल करने को लेकर स्विट्जरलैंड में जारी यह पूर्ण बैठक सियोल के पूर्ण सत्र के फैसले का पालन करेगी और सर्वसम्मति पर फैसले के सिद्धांत को बरकार रखेगी.’

एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भारत के एनएसजी में प्रवेश के बारे में बात करने के बाद इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा था. लेकिन चीन के ताजा रुख से भारत की उम्मीद एक बार फिर धूमिल हो गई. चीन पहले भी कई बार कह चुका है कि भारत जब तक एनपीटी पर दस्तखत नहीं करेगा, उसे इस संगठन में शामिल नहीं किया जाएगा. 48 देशों के समूह में भारत की दावेदारी के बाद पाकिस्तान ने भी आवेदन दिया है. भारत को अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है तो चीन पाकिस्तान का समर्थन कर ​रहा है.